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मुंशी प्रेमचंद

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सारांश

सारे गाँव में मथुरा का-सा गठीला जवान न था। कोई बीस बरस की उमर थी। मसें भीग रही थीं। गउएँ चराता, दूध पीता, कसरत करता, कुश्ती लड़ता था और सारे दिन बाँसुरी बजाता हाट में विचरता था। ब्याह हो गया था, पर ...
Rohit Paikra
समाज कि बुराई से रुबरु करती कहानी।
Archana Varshney
बहुत सुंदर
monika
Naari k sabar or prem ki parakashtha.
अशोक कुमार खत्री
पहलवानी की उछ्रंखलता, संघर्ष की जिजीविषा, नारी का उत्कर्ष, आत्मिक प्रेम का अवलम्बन
Sumit Kumar
अतिसुन्दर
Shruti Sankritya
awesome outstanding story
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