आदमी का किसी का आदमी होना

शशि पाण्डेय

आदमी का किसी का आदमी होना
पाठक संख्या − 378
पढ़िए

सारांश

सदियों से एक विचित्र परम्परा ,आदमी किसी का भी हो.. उसके होने का अस्तित्व उसका किसी का आदमी होने से ही होता है । आदमी का किसी का आदमी होना भी किसी नये अवतार से कम नही होता । लोग गौरव महसूस करते हैं जब ...
करतार सिंह राजस्थानी
वाक़ई बहुत खूब ....सुंदर एवं कलात्मक व्यंग
Bhuvneshwar Chaurasiya
बेहतरीन व्यंग रचनाएं बहुत बहुत बधाई।
Omee Bhargava
शशि जी आपका यह व्यंग बहुत अच्छा है इसे री लाइट करके और अधिक धारदार बनाया जा सकता व्यंग में जितनी अधिक धार होगी उतना ही अधिक पाठकों को मजा आएगा विषय आपका बहुत शानदार है विषय वस्तु की ठीक है अमूमन व्यंग ठीक है लेकिन इस विषय पर और मेहनत की जा सकती है तो एक कालजई व्यंग रचना हो जाएगी एक अच्छे व्यंग्य के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद एवम उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.