आत्म-संतुष्टि

मिताली सिंह

आत्म-संतुष्टि
(73)
पाठक संख्या − 3746
पढ़िए

सारांश

आज सुबह से ही बहुत तेज बरसात हो रही थी । फुहारें जैसे जैसे तेज हो रही थीं, मेरे माथे की षिकन भी वैसे वैसे गहराती जा रही थी । आज आॅफिस कैसे पहुंॅचूंगी बस यही एक प्रष्न मन में उमड़ घुमड़ रहा था । छुट्टी ...
Neelam Mehra
बहुत ही प्यारी सी मन को छू लेने वाली रचना। ममता और करूणा का भाव मन में हिलोरें मारने लगा। जी चाहता है अभी किसी मा,सूम को गले लगा
Sudhir Kumar Sharma
प्रेरणा स्रोत
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.