आत्म-संतुष्टि

मिताली सिंह

आत्म-संतुष्टि
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सारांश

आज सुबह से ही बहुत तेज बरसात हो रही थी । फुहारें जैसे जैसे तेज हो रही थीं, मेरे माथे की षिकन भी वैसे वैसे गहराती जा रही थी । आज आॅफिस कैसे पहुंॅचूंगी बस यही एक प्रष्न मन में उमड़ घुमड़ रहा था । छुट्टी ...
Sudhir Kumar Sharma
प्रेरणा स्रोत
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