आत्म-समर्पण

डॉ. अशोक चतुर्वेदी

आत्म-समर्पण
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सारांश

लघुकथा
Lokesh Kumar Verma
अपराध कभी मन को सुकून और चैन नही देता। अपराध भाव से ग्रसित व्यक्ति कितना भी भौतिक सुविधाओं से सम्पन्न हो पर मन से विचलित जरूर होता हैं। आपकी रचना उम्दा हैं।
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