आत्मग्लानि

सुरेखा शर्मा

आत्मग्लानि
(185)
पाठक संख्या − 8152
पढ़िए
Amit Yadav
sachai h smaj ki jo kbi kbi dikhti h
Prashant Dixit
बच्चे क्यों ऐसे हो जाते है ।इतना पत्त्थर दिल
smriti
बहुत ही मार्मिक कहानी, सही बात है कि लोग हर बात में दोष बहू को दे देते हैं जबकि जरूरी नहीं कि बेटा सही ही हो
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संतोष यादव
BC AASHU AA GAYE
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Satish Bansal
दिल को छु गई 👍
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Swarn Deep
हृदय को छू लिया आपकी रचना ने
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Avinash Pandey
bhut hi acchi story hai..hm kisi paraye ko kitni jldi judge kr lete hai..aajk ye sare family me dekhne ko mil jayega
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Vimal Misra
Ajj ke jamane ka sahi chitran
manoj joshi
सटीक कहानी । आज के मानदंडों में।
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Jagriti Godara
बहुत ही सुन्दर रचना है
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