आत्मग्लानि

सुरेखा शर्मा

आत्मग्लानि
(202)
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सारांश

नागेश आफिस से आकर अपनी गाड़ी का हार्न बार-बार बजाए जा रहा था,फिर भी बाहर कोई नही आया तो उसका माथा ठनका।अच्छे विचार आने की बजाए मन में कुछ उलझन -सी हुई।गाड़ी से उतर कर जल्दी से अन्दर गया तो वहाँ का दृश
Usha Vatsa
very beautiful samaj sare burai bahu me he bekal daita hai
Mamta Gupta
superb.... speechless story
Annu Rai
aaj ke samaj ka aaina.
anuradha bhati
हृदयस्पर्शी रचना..
Pranjul Rajput
Log apne hi parents se jb ajnabi jaise treat karne lgte h to bechare parents pe kya beetati hogi ye wo tabhi samjhenge jb unke Bacchae aisa krenge aur wo laachar honge...
Amit Yadav
sachai h smaj ki jo kbi kbi dikhti h
Prashant Dixit
बच्चे क्यों ऐसे हो जाते है ।इतना पत्त्थर दिल
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