आठ तल्ले से गिरे हीरा बाबू

देवेन्द्र प्रसाद

आठ तल्ले से गिरे हीरा बाबू
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सारांश

हीरा बाबू को लगा जैसे फ्लैट में नहीं किसी मायालोक या फिर उससे भी बढ़कर कहें तो किसी आश्चर्यलोक में वे आ गए हैं। इसे ही कहते हैं ज़मीन से उठकर आसमान में टँग जाना। आठवें तल्ले से वे नीचे झाँकते तो ...
Jamuna Krishnaraj
आजकल की कड़वी सच्चाई को उकेर कर रख दिया है आपने! पैसे के पीछे भागती आज की पीढ़ी में बुजुर्गों की भावनाओं का कोई परवाह नहीं। पाश्चात्य संस्कृति के मोह में पड़ वे अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। बढ़ रही वृद्धाश्रमों की संख्या इसी की पुष्टि करती है। बधाई!
Angel Qazi
Nice Bhut achhi kahani hai heart touching
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Balwant Kaur
h Heart touching story
डॉ.रानू मुखर्जी
लाजवाब । समसामयिक संवेदनशील कथा ।बधाई स्वीकारें ।नमस्कार
मनीष यादव
अदभुत रचना।मर्मस्पर्शी।
Guna Gaur
मार्मिक
Induvyas Induvyas
दिल को छू लेने वाली कहानी है
Jyoti Vyas
मर्मान्तक कहानी काश हीरा भाई मकान बेचने से मना कर पाते।6
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