आज के युग का अमर प्रेम

शीत राज

आज के युग का अमर प्रेम
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सारांश

कमरे में अभी भी बस लैपटॉप की मद्धिम नीली प्रकाश थी, मगर वहां जीवन का एक अनंत प्रकाश भी फैला था. दारू और सिगरेट की जगह प्रेम और सेवा की सुगन्धि फैली हुई थी. और कोने में वही बिस्तर परा था, जहाँ आज भी रोज कोमल उससे मिलने आती थी, उसके सपनो में. हर प्रेम कहानी की पूर्णता नायक-नायिका के मिल जाने पर ही नहीं होती. कुछ प्रेम ही इतना महान होता है कि, वो अपने आप में ही पूर्णता को समेटे हुए है. ऐसे भी पा लेना प्रेम नहीं; पाने की जिद्द तो स्वार्थ के रास्ते पर ले जाती है. प्रेम तो बस एक एहसास है, जो आत्मा में बसती है, और आमरण साथ निभाती है.
Gita Gupta
bahut badhiya prem m nirasha keval rone k liye nahi h ye prerna ka bhi kaam karta h
प्रिया ठाकुर
प्यार की सार्थकता सिद्ध करती है ये रचना। लाजवाब
Uday Pratap Srivastava
एक अच्छी रचना
सरिता सन्धु
सच बहुत अच्छी कहानी लिखी।सौरभ ने अपने जीवन को जो एक नई दिशा दी वही कहानी का सुखद अंत है।
Sunny Kansykar
bahot badhiya story or story me sunder sa massage... kahani likhne bale ko bahot sara thanks..
Pawan Pandey
बहुत अच्छी कहानी है.
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