आज की सावित्री

डॉ ज्योत्स्ना गुप्ता

आज की सावित्री
(42)
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सारांश

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नही मिलता कही ज़मी तो कही आसमाँ नही मिलता मणिका रसोई में काम करते हुए गुनगुना रही थी, गीत गाना उसका शौक था सुरीली आवाज की मालकिन मणिका अक्सर यही गीत गुनगुनाया करती। तभी ...
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behtreen or practical khani .
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aparna
वाह वाह,इतनी सुन्दर कहानी रचने के लिये लेखिका को ढेरों शुभकामनायें😊👍
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PRABHU MUDGAL
बहतरीन कहानी👌👌👌👌
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Jayasudhir Pandey
superb
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DrAnamika Bhagat
करता कहूं शब्द ही नहीं है।।।🙏🌹
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Nidhi shukla
very interesting story
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Kritika Tiwari
nice story
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Neelam Jangra
very interesting story
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sugandh yadav
speechlesss
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