आजाद हिंद

Jitendra Moslapuriya

आजाद हिंद
(4)
पाठक संख्या − 63
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सारांश

अब किसी का जोर नहीं , न पहरे हैं न यंत्र कयोंकि ये है सबसे बड़ा भारत लोकतंत्र अब किसी से रुकेगा नहीं, भारत है स्वतंत्र जब याद आती है, कुरबानी उन वीरो की खून भरे थे हाथ जिनके, बंधी थी जंजीरो की ...
Dipti Biswas
गज़ब शानदार लिख दिया आपने।।।। जय हिंद।।।
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Shreya Chaturvedi
super 👌
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Sandhya Bakshi
कविता देशभक्ति की हो तो , झुक कर नमन करना बनता है । बहुत खूब लिखा आपने । जयहिंद ! जय भारत !
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Asha Shukla
🌺🌺वाह!!!👌👌💐💐बहुत ही सुंदर कविता!!🌺🌺
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