आजादी, जिस्म के कैद से ***

Pawan Pandey

आजादी, जिस्म के कैद से ***
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सारांश

सुगंधा अपने जिस्म के आदत से बहुत तंग थी। अकेले वजूद उसे नींद नहीं आती थी। जिस रात सुनील नशा करके और जुआ खेल कर आता था,बहुत देर हो जाती थी। वह अपने के छोटे से दलान में फिरती थी। सुनील गिरता पड़ता ...
Anupam Shukla
बहुत ही सुंदर कहानी है।
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Pragya Pandey Tiwari
nice
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Mamta Pattanaik
verygoodstory
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neeta
different topic .good story
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Sk Thakur
nice
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Poonam Tiwari
Nice
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Pihu Shekhawat
nice
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Renu Kiran sharma
Bahut बेहतरीन रचना
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Ruchi Sharma
bahut khoob sir
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pooja
bhut hi sundar
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