आखिर क्यों ....??

नेहा भारद्वाज

आखिर क्यों ....??
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सारांश

क्या हुआ मौसी ...?? कुछ नही ....कुछ नही !! कहते कहते ..... फिर से राधा मौसी फफक पड़ी । अरे मौसी ! क्या हुआ ...??? बताइए तो सही ,रुकिए ! एक मिनट मैं पानी लाती हूँ , भाग कर रिंकी पानी लेकर आई और दरवाजा ...
Devkinandan soni
माना कि लड़के को सुधारने के लिए किसी लड़की से शादी इसलिए नही करनी चाहिए कि लड़की सुधार देगी लेकिन यह भी सत्य है कि लड़की चाहे तो पति को सुधार सकती है।90% लड़को को सुधारा जा सकता है एक लड़की द्वरा या वो कम तो कर ही देगा यह पक्का है।
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Devendra Kumar Mishra
एक तरफ सरकार महिलाओं के उत्थान की बात करती है। दूसरी तरफ शराब की खुली बिक्री कही न कही पुरषो की इस महिलाओं के प्रति अन्याय को बढ़ावा देना है। कहानी नही हजारों परिवारों की व्यथा है।
Ashu Rathore
काश लोग शराब न पीते तो कितनी अच्छी दुनिया होती
शशि सृजन
सबकुछ सह होने की कामना करना ऐसा है जैसे किसी चमत्कार की उम्मीद करना और मुझे नही लगता कि किसी को भी ऐसी कामना करनी चाहिए विवाह बंधन में जुड़ी दोनों ज़िंदगियों को खुलकर साँस लेने का पूरा हक़ होता है, न कि एक बेलगाम मौज भरी ज़िन्दगी जिए और दूसरा घुट-घुट कर किसी चमत्कार की आस में अपनी हर खुशी बिसार दे| क्षमा चाहती हूं पढना में आपकी कहानी बहुत अच्छी है पर वास्तव में ऐसी महिलाओं मुझे अपराधी से कम नहीं लगती हैं जो एक आदर्श उदाहरण बनकर बाकी महिलाओं का जीवन और दूभर बनादेती हैं क्योंकि हरकोई कत्तई इतना सहनशील नही होता है |
Neeha Bhasin
Bina lag lapet ke bina masala lagaye sahi sahi vyatha sachhai se bayan ki...
Ankita Dewan
BAHUT SACCHAI HAI IS KAHANI MAI..AISA HI HOTA HAI JISKA PATI SHARABI HOTA HAI..WOH HAR SHADI FUNCTION MAI BAWAAL KARTA HAI AUR SHARAMSAAR AUTARO KO HONA PADTA HAI..
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Usha Garg
सत्य
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