आई एम द फो

शशि रंजन

आई एम द फो
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सारांश

जैसे हि मेरी आंखे खुली मेरी आंखे चुंधीया गई. वहाँ बहूत रौशनी था. पुरा उजाल. मैंने उठना चाहा पर पुरे बदन मे दर्द था, मुझे परेशानी हो रही थी, मै बेचैन हो रहा था...“hey, relax buddy. now you are safe” कोई फिमेल voice थी जो तेजी से मेरे नजदिक आई अपनी आवाज के साथ. वो एक नर्श थी. “are you ok” she said “मैं कहाँ हूँ?” मैंने बेचैनी से पुछा और उठना चाहा “don’t move….you are in hospitol” “where is my wife, my friends” मै और ज्यादा बेचैन होने लगा.मुझे वो सारी बांते अचानक से फ्लैश हुई........कैसे उस ट्रक ने आटो को टक्कर मारा था और आटो सडक पर पलटखनीया खाते हुये काफी आगे चला गया था......फिर उस आटो को भी टक्कर लगी थी जिसमे हम दोनो बैठे हुये थे......मै चिख पडा.. “where is my wife, my friends ?” मेरी सांसे तेज हो रही थी...वो नर्श डाक्टर को बुलाने लगी. डाक्टर ने आने बाद नर्श को जाने को कहा..और मेरी तरफ...देखते हुये “शांत हो जाओ, मै तुम्हारे सारे सवालो का जवाब देता हूँ......relax..ok
Astha Shrivastav
F O E ... iska mtlb kya h... story bhot achi h ... next jldi hi likhiyega vrna fir story yad ni rehti..
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Somesh Ârmo
👌👌👌👌👌
Davinder Kumar
आप की कहानी बेहद रोचक है और कहानी पर आप की पकड़ बेमिसाल है कहानी का अंत अधूरा लगता है. आपकी भाषा में छोटी मोटी गलतियां हैं कृपया ध्यान दीजिए.
Asaq Subhan
mind blowing, outstanding story
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sapna
Avery good story.waiting for the next part
Trapti Tamrakar
अच्छी है स्टोरी।बस कही कही लिखावट और इंग्लिश में गड़बड़ी है।
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