आईना क्यूँ न दूँ के तमाशा कहें जिसे

मिर्ज़ा ग़ालिब

आईना क्यूँ न दूँ के तमाशा कहें जिसे
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सारांश

आईना क्यूँ न दूँ के तमाशा कहें जिसे ऐसा कहाँ से लाऊँ के तुझसा कहें जिसे हसरत ने ला रखा तेरी बज़्म-ए-ख़्याल में गुलदस्ता-ए-निगाह सुवेदा कहें जिसे फूँका है किसने गोशे मुहब्बत में ऐ ...
Shyam Rathi
कुछ उर्दू लफ्ज़ो का हिंदी अनुवाद हो तो, बहुत ही उम्दा होगा।
Amarjit Kastwar
क्या कहें, कि अल्फाज़ नहीं मिलते हम तो बुत बन गए हैं आपके दीदार से।
zeeshan ulhaq
आप के लिये कोई अल्फ़ाज़ नहीं मिलते क्या तारीफ करु
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