आँख वाली सड़कें

आशुतोष कुमार

आँख वाली सड़कें
(116)
पाठक संख्या − 6688
पढ़िए

सारांश

बाथरूम से निकलकर मैं बालकनी में आई. अपने गीले बालों से लिपटे तौलिए को झटका तो खिड़की पर बैठे कबूतर फड़फड़ा कर उड़ गए. मैं घबरा गयी. ये इसी तरह चौंकाते रहते हैं. ये मुझे चौकाते हैं, मैं इनको. हमेशा कोसती ...
Poonam Garg
कहानी ने निशब्द कर दिया
Bhawna Kanungo
Bahut badhiya lekhan shaily.. Very nice capturing
रिप्लाय
Meena Bhatt.
bahut hi umda kahani ek samajik socha
रिप्लाय
Neha Neha
kya bdiya trike se is story ko likha h aapne 👍
रिप्लाय
Dushiyant Raghav
vishay to pahle bhi kaha ja chuka he...lekin aapne bahut hi normal shabdon ko gahre tk utar diya h
रिप्लाय
kamal
kya yehi bharat hai
Manish Singh
now understood the reason for making toilet a love story...
Ushman
bhut Kuch sikhati ye khani
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.