अलविदा....

विनय कुमार पाण्डेय

अलविदा....
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सारांश

“अपना ख्याल रखना।" यही शब्द निकल पाए थे उसके मुख से। कहना तो वह बहुत कुछ चाहता था. परंतु वो सब बातें उसके हृदय में ही रह गयी। वह जनता था की शायद यह उनकी आख़िरी मुलाकात हो। परंतु हालात ऐसे हो चुके थे ...
Ravindra Narayan Pahalwan
रचना बहुत अच्छी है / शीर्षक ठीक नहीं / मिलने उम्मीद ? / लेकिन, चाह तो है / इसलिए खुदा हाफिज़...
Murli Ram
अच्छी रचना है।
Sonu Chaudhary
kahani chhoti h pr jitni bhi h achhi h
Preet Kaur
एसा ही एक platform मेरे नसीब मे भी लिखा था।
Reena Bhardwaj
kitnii dard bhrii bat likhi hai apne.😢....me ik bat puchna cahungii ki ye story sach hai ya klpna
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