अलग राह

डॉ ज्योत्स्ना गुप्ता

अलग राह
(18)
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सारांश

अब तुम एक नई राह तय करोगे,मैं इससे आगे तुम संग न चल सकूँगी।लड़की हूँ .......तो एक लड़की की भावनाएं समझ सकती हूँ।तुमको पूरी तरह से... सिर्फ उसी का होकर रहना है। फिर हमने ये वादा भी किया था न कि किसी रोज़ ...
Sjl Patel
script chota sa h lekin baat bahut hi gahrai ki h.👌👌👌👌👌👌
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सुरेखा अग्रवाल
निःशब्द
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Rachna Awadhesh
awsm
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Swarup Acharya
beautiful ..
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Pawan Pandey
बेहतरीन रचना है।
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मंजुबाला
nice
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Nidhi shukla
very nice story
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Om Shankar
अकथ अनुनय
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