अलख निरंजन - भाग 2

Kamal Kant Agarwal "राज़"

अलख निरंजन - भाग 2
(34)
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सारांश

एक ऐसी कहानी जो टिकी है झूठ पर, अंधे विश्वास पर, और कोशिश है इसके माध्यम से अन्धविश्वास के खिलाफ एक जागरुकता जगाने की
😊
🤔 भभुत
Rajni Gupta
👍👍🏼
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ओ.पी. सुमन
bahut badhiya....
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vishal suriya
kahani badiya chal rahi hai
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Hansraj Saini
बहुत खूब...
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Mahesh Dwivedi
आज के हालात में कई बाबा जेल में है जिन्होंने अपनी चालाकी से अन्धविस्वासी लोगों का विश्वास लूटा है लेखक को कहानी के अगले हिस्से को आगे इन लोगों की पोल खोलना चाहिए
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Vivek Singh
very nice story, but iske parts jaldi jaldi layiye
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Gaurav Neema
ऐसे ही ठगोरे बाबाओं के झांसे में मासूम लोग आ जाते है और असली बाबाओं को भी झूठा ही समझते हैं....
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Deepak Sharma
Har jagah sirf or sirf andhvishwas faila hai............or aise pakhandi log iska fayda uthate hain........but going very well please keep on writing....
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सिमरन जयेश्वरी
kahani baba log par hone waale andhvishwas ko sahi se darsha rahi hai ye log sbko ese hi bewkoof bana kar pesa enthte hai..
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