अर्पूण प्रेम

Vandana Prasad

अर्पूण प्रेम
(111)
पाठक संख्या − 2421
पढ़िए

सारांश

"प्रेम" क्या कभी पूर्णता दे सकता है। जो शब्द ही अपूर्ण है वह पूर्णता कैसे दे सकता है क्योंकि प्रेम में 'प्' तो पूरा है ही नहीं वह आधा है, अधूरा है। प्रेम में कुछ ना कुछ छूट जाना स्वाभाविक है। जहाँ आप ...
Asha Shukla
कमाल का लेखन!!!बहुत सुंदर कहानी!!!!मार्मिक,,ह्रदयस्पर्शी कथानक!!!!सुंदर शब्द-शिल्प!👌👌👌👌👌💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
Anjali Chopra
बहुत खूबसूरत ❤❤
Ram ishwar111
बहुत अच्छा। अच्छा लगा पढ़कर
gagan
heart touching story so nice
Arvind Makwana
Vaah bahut badhiya 👌
P Wagh
बहोत खूब व्याख्या...👌👍
R Mohan Parnami
बहुत खूब भावुकता से परिपूर्ण कहानी सम्बधों की हकीकत दर्शाती
Navin Bairwa
अपूर्ण प्रेम प्रेम बहुत उम्दा लेख वंदना जी आपकी लेखनी बहुत शानदार है इसी तरह आगे लिखते रहिए। आपकी अगली कहानी का बेसब्री से इंतजार रहेगा
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.