अर्पिता और पिता

गौरव मौर्या

अर्पिता और पिता
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सारांश

आज सुबह अर्पिता अपनी शादी के पूरे सात साल बाद अपने मायके आई। मायके में केवल उसके पिता और एक नौकर रहतें थे। अर्पिता की माँ काफी पहले ही गुज़र चुकी थी और अर्पिता का भाई अपनी नौकरी की वजह से दूसरे शहर ...
Janvee Sahu
प्रेरणादायक कहानी बहुत ही सुन्दर
प्रभु दयाल मंढइया
मित्रवर श्री गौरव मौर्या जी बधाई और साधुवाद।आपकी कहानी सार्थक तथा प्रेरणादायक है।निश्चय ही आपकी सोच भी सकारात्मक तथा उत्साह से परिपूर्ण है।आप जैसे उत्साही लोग ही जीवन में आनन्द का अनुभव करते हैं।शुभकामनाएं। लिखते रहें।
Suresh Shukla
Positive thing makes Positive way.
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