अभागी ठकुराइन

ऋतिक राज चौहान

अभागी ठकुराइन
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सारांश

"भोलू...ए भोलू! कहाँ मर गया? तुझे दिखता नहीं है क्या हवेली के चारों तरफ कितनी गंदगी फैल गई है....चल जल्दी से सफाई कर।" एक दिन अचानक ही कुसुम की नज़र हवेली के आसपास फैली गंदगी पर गई तो उसने अपने गूंगे ...
Pravasini Satapathy
कहानी पड़ कर बहुत दुख हुआ. समाज में एसे भी लोग हैं. जो कुसुम और भालु के साथ जोड़ा जा रहा है ओ हजम नहीं हुआ. ओ घर में भी तो दो लोगों रहते थे.
Alka Rastogi
end sahi nahi tha😢😢😢
Usha Garg
आज के जमाने की नही लगती पर इतना जुल्म उफ
Saroj Vishwakarma
कहानी अभागी ठकुराइन का कथानक तो अचछा हैं किनतु कहानी चरम पर पहुंच कर लडखडा गई ठकुराइन कुसुम को बचाने गई और खुद शिकार ह़ गई. विश्वास योगय न ही लगता। प्रथम तो नीची जाति के लोगों मे ईतना साहस नहीं होता कि वे हवेली की ठकुराइन से संबंध बनाए. और उसे मारे। हजार वो नशे में थे लेकिन हजम नही होती. इसके अलावा जब कोई किसी की मदद करता है तब ईशवर उसकी मदद करते हैंसाप बिच्छू कुछ भी आ सकता था. दूसरे ठकुराइन खेत मैं भोलू के साथ...।।ठकुराइन भोलू के साथ हवेली मे भी सब कर सकती थीं वहां कोई देखने वाला भी न होता। ऐसे मे खेत मे.।।। विशवशनीय नही लगता। पचायत का फैसला पूर्ण रुप से इकतरफा. लगता हैं. धनयवाद. सरोज.
Rupal Lila
bhola ka gamchha khet me kahan se..? our thakurain ne bhola ko nhi btaya ki hariya our uske sathiyon ne ijjat luti to bhola ne wo khnjar hariya ke sine k aarpar krne ka kaise socha.bahut uljan he ,thik se samj nhi aaya.
Renu
स्तब्ध करने वाली कथा है रितिक जी। ठाकुर समाज में र तरह की बहुत घटनाएं सुनती रहती हूँ।
हजारी लाल बैरवा
आज के समय में यही हो रहा है
शुभम सिंह
बहुत लाजवाब सुन्दर 💗🙏🙏
NareshN NareshN
बहुत अच्छा लिखा
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