अब तुम आयीं

गोवर्धन यादव

अब तुम आयीं
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सारांश

लहरों पर इठलाती बलखाती धूप बस, ऐसे ही छा जाता तुम्हारा यौवन रुप कमलाकर को पाकर जैसे खिल पड़ा कमल याद आते ही बस हंस पड़ा दिल पक्षियों का किल्लोल रिझाने वाले गाने लगता रह-रह कर दे रही मुझको ताने मंथर गति ...
विकास कुमार
वाह बहुत सुन्दर " सर मै आपको अपनी कविता "तू कौन " पढ़ने क लिए आमंत्रित करता हूँ | धन्यवाद https://hindi.pratilipi.com/story/तू-कौन-4GiIbMMDJuGf
Vikas
अच्छी कविता.
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