अबला नहीं हो तुम

Gaurav Kumar 'वशिष्ठ'

अबला नहीं हो तुम
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सारांश

कब तक डरती रहोगी की... कोई तेजाब फेंक कर तुम्हारा शरीर जला जाएगा? अगर तुम अपने अंदर के काली को जगा लो, तब तो डरेंगे वो लोग? उनके अंदर भी यही भय होना चाहिए कि कोई उनके शरीर पर भी तेजाब फेंक सकता है।
nilam
bilkul sahi.
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Meenakshi Sial
bilkul sahi likha. nari ko khud hee apni suraksha karni hogi
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shani gupta
आपने तो मेरी पूरी सोच ही बदल डाली मै ऐसा सोच भी नहीं सकता वाकई आपकी कहानी समाज को एक दूसरे और बेहतर रास्ते पर ले जा सकता है. आपका धन्यवाद
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pradeep kumar
its'true
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Malti Sengar
बिलकुल सही कहा आपने, नारियों को ही आगे आना पड़ेगा। अच्छे विषय पर आपने रचना लिखी। धन्यवाद
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Juhi Khanam
आजकल दूसरे के फ़टे में कोई टांग नही अड़ाता, चाहे लड़की हो या लड़का। और दूसरी बात लड़की और लड़कों का प्राकृतिक स्वभाव। अगर 4 लड़के साथ हों और उनके किसी एक साथी पर कोई हाथ उठा दे तो वो चारो एक साथ उस हमला करने वाले पर टूट पड़ेंगे। लेकिन अगर 4 लड़कियां एक साथ हों और कोई लड़का उन में से एक को टक्कर मार कर चला जाये तो बाकि लड़कियाँ उस पीड़ित लड़की से दूर हो जाती हैं कि कहीं इसके साथ साथ हमे भी न छेड़ दे ये लड़का।
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Chanda Kumari
agree with your points. more than five starred story.
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Jyoti Dawar
बहुत सही बात है
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lata Bhardwaj
बहुत प्रेरणादायक कहानी है। शानदार और लाजबाब
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Shyamali Gaurav
bahut khub
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