अबला नहीं हो तुम

Gaurav Kumar 'वशिष्ठ'

अबला नहीं हो तुम
(225)
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सारांश

कब तक डरती रहोगी की... कोई तेजाब फेंक कर तुम्हारा शरीर जला जाएगा? अगर तुम अपने अंदर के काली को जगा लो, तब तो डरेंगे वो लोग? उनके अंदर भी यही भय होना चाहिए कि कोई उनके शरीर पर भी तेजाब फेंक सकता है।
Jitendra Ummat
Nice thoughts
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Vinay Anand
यकीनन आइना दिखाती रचना
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Rajkumari Mansukhani
baatbilkul thik kahi per problem y hai ki unity nahin hoti me aapke vichato se puri tarah sahmat hoon jaan ke dsr se darti nahin her galat baat ks liye bolti hoon isliye mujhe jhandi ki rani aur ladski bolte hai pet me parwah nahin marna yo hsi hi ekdin darna kyu
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मनीषा सहाय
आपने बहुत सारे प्रशनों को अपनी लेखनी के माध्यम से किया है.... किसी भी समाज का विकास उसके बौद्धिक विकास से होना चाहिय... भेदभाव हमारे समाज का अभिन्न अंग बन चुका है... और उसका उतरदायित्व समाज संचालको पर जाता है क्योंकी हमारे यहाँ पुरूष सतात्मक समाज है जब तक यह बराबरी स्त्री को नही मिलेगी तबतक हम कई क्षेत्रों में तो बराबरी कर लेगेपर मानसिक स्तर पर कमजोर ही रह जाएंगे।
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Kiran Sharma
yes I agree with you। अपनी रक्षा खुद करो।जूडो सीखो कराटे सीखो । प्रकृति के दिए हाथ पैरो का और दिमाग का प्रयोग करो
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पिंकी राजपूत
बेहतरीन विषय! जहाँ तक सुरक्षा की बात है ललित के शब्दों से पूर्णतः सहमत हूँ लेकिन समानता तो हमारा जन्मसिध्द अधिकार है.. इस समस्या का मूल कारण मुझे परवरिश और संस्कारों की कमी ही लगती है,, बचपन से ही लड़की और लड़के की परवरिश में इतना भेदभाव किया जाना.. लड़की तो कम ही निर्भर रहना चाहती है किसी पुरुष(पिता,भाई...) पर लेकिन उनकी मानसिकता एेसी हो जाती है कि वो खुद को लड़की का अभिभावक समझने लगते हैं... न जाने क्यों और कैसे पुरुष की मानसिकता इतनी गंदी है न केवल वो ओछी हरकतें करते हैं बल्कि कभी पास से गुजरते हुए इतने गंदे शब्दों का प्रयोग करते हैं,जिससे दिमाग अशान्त सा महसूस करता है, क्या इसकी भी कोई प्रतिक्रिया हो सकती है?
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Atiya Sultana
Lalit ki bato mujheb bahot himmat mili vakai agar ladkiya chahe to kya nahi kar saktih bas ek koshish ki zarurath
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Pramila Joshi
आपका आंकलन सही।लडकियों को के जी से कराटे आदि सिखाये जाय।कला व कुछ विषय कम कर दिये जाय।
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puneeta
jahan dher saari ladkiyaan hain wahan to mil ke nibet len par jab akele ladki ko char mil ke chheden TV kya Karen ???jab chhoti chhoti bachchiyon ka rape ho to wo kaise bachen????jab same kaam ke liye ladkon ko jyada salary mile aur objection karne pe kaam se nakala jaye tab kya Karen.....bahut asaamanata hai abhi bhi ....kuchh solution hai aapke paas
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Shourabh Prabhat
सही कहा आपने.... जब तक औरतें स्वयं समाधान न निकाल लें तब तक स्थिति कभी नहीं बदलेगी..... कृपया मेरी रचनाओं पर भी अपनी नज़र करें
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