अबला नहीं हो तुम

Gaurav Kumar 'वशिष्ठ'

अबला नहीं हो तुम
(175)
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सारांश

कब तक डरती रहोगी की... कोई तेजाब फेंक कर तुम्हारा शरीर जला जाएगा? अगर तुम अपने अंदर के काली को जगा लो, तब तो डरेंगे वो लोग? उनके अंदर भी यही भय होना चाहिए कि कोई उनके शरीर पर भी तेजाब फेंक सकता है।
Sanjeev Gupta
सच्चाई लिखी है आपने
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garina
bahut sahi likha hai
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Aruna Vyas Bissa
लेखक ने सही कहा
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Runaz Bargir
Bahut Sunder.. aur sahi likha hai.. 👌👌👌
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Payal Das
👌👌👌👌
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PANCHDEV KUMAR
बहुत खूब. . .
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Utkarsh Mishra
Badhiya. 👌
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Vipendra Yadav
👍👍👍👍
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Navneet Kaur
sahi
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Kamlesh Patni
अपने को सबला बनाना होगा।बिलकुल सही कहा है कहानीकार ने।लेखक धन्यवाद के पा त्र हैं।
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