अपेक्षा

नीरज शर्मा

अपेक्षा
(100)
पाठक संख्या − 8042
पढ़िए

सारांश

"रीमा, तुमने नीलेश को फोन कर दिया था न तत्काल में रिज़र्वेशन कराने के लिए?" सुमित ने नाश्ते की प्लेट अपनी ओर सरकाते हुए पूछा। "जी, उसी के फोन का इंतज़ार कर रही हूं। रिज़र्वेशन मिल जाए तो अच्छा है, ...
Poonam lala
mujhe mere dono Beto per naaz h....aise hi h wo..
V🎗 K🍭
जितनी तारीफ उतना कम खुशी के बहुत पल समेट रखे है इसने।।।
anil das
🗼very nice 🗼⭐⭐⭐⭐⭐
Meena Bhatt.
बेटे ऐसे ही होते हैं।सुंदर कहानी।
PAWAN SINGH RATHOUR
सब एक दूसरे के पूरक हैं एक परिवार में एक दूसरे के मनोभाव को इतने अच्छे समझना वाकई 'अनमोल' है।
Archana Varshney
एक सुखद रचना
Ajit
Thank you Neeraj ji for such a lovely story
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.