अपने ही क़ौल

राहुल द्विवेदी

अपने ही क़ौल
(6)
पाठक संख्या − 220
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सारांश

अपने ही क़ौल से मुकर जाऊँ । इससे बेहतर है खुद में (खुद ही) मर जाऊँ ।। तू मेरी रूह की हिफ़ाजत है ; बिन तेरे जाऊँ तो किधर जाऊँ । तेरी साँसों को ओढ़कर हमदम ; जिस्म से रूह तक सँवर जाऊँ । इश्क में हद तो पार ...
Dippriya Mishra
खूबसूरत अभिव्यक्ति
Ujjwal Trivedi
बहुत सुंदर
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