अपने हिस्से का नरक

रीत शर्मा

अपने हिस्से का नरक
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सारांश

सीलन भरे अंधरे कमरे मैं सिगरेट की बू बसी हुई है सिल्की हां अब यही उसका नाम है माँ बाप ने बड़ी उमीदो से भाग्य लक्ष्मी नाम रखा था ! सिल्की उस दम घोटू माहोल मैं बिस्तर पर लेटी रौशनी की आखरी किरणों को निहार रही थी उस कमरे मैं बस यह छोटी सी खिड़की ही बाहर की दुनिया  से उसका परिचय करवाती थी
Mamta Upadhyay
प्रेरणादायक स्टोरी
Rakesh Dua
बहुत ही अच्छी कहानी और एक अच्छी शिक्षा देती हुई,खासतौर पर लड़कियों के लिए कि जो लड़कियां ऐसे गलत कदम उठाती हैं उनका क्या हाल होता है और जो दूसरों को धोखा देते हैं उनका अंत उससे भी बुरा होता है ऐसी कथाओं की आज समाज को जरूरत हैं.... कथा शेयर करने के लिए धन्यवाद
रिप्लाय
Mohit singh bhadoriya
सच्चे किस्से सिर्फ किताबों में मिलते हैं प्रेम लोगो की दुकान बन गया है जो कभी अम्रत था वो विष बन चुका है।। सुखद अंत के लिए धन्यवाद
ajay srivastava
यह कहानी आज के परिवेश में बहुत ही प्रेरक है
Sunita Namdeo
AK galat Kadam se gindgi barbad Kar li kash pyar Mai na pdkar Shiksha ke mahtv Ko samjha hota
Rajni Gupta
beautifully defined
Atamjitlal Malhotra
ग्रामीण जीवन के परिपेक्ष्य में ये कहानी सच्ची लगती है।
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