अपत्‍नी

ममता कालिया

अपत्‍नी
(39)
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सारांश

हम लोग अपने जूते समुद्र तट पर ही मैले कर चुके थे। जहाँ ऊंची - ऊंची सूखी रेत थी, उसमें चले थे और अब हरीश के जूतों की पॉलिश व मेरे पंजों पर लगी क्यूटेक्स धुंधली हो गयी थी। मेरी साड़ी क़ी परतें भी ...
अनुश्री त्रिपाठी मिश्रा
kuch adhuri adhuri si lagi jaise kahani , Laga Abhi aage aur bahut lambi honi chaiye thi , interesting thi 👌👌
arun singh
last line made this story complete.
Rita Islam
अच्छी कहानी।
Sweta parmar
प्रभावपूर्ण लेखन
Pushpak Pandey
अच्छी कहनी है .
Sahar Saikh
ajeeb se kahani lge
hindi@pratilipi.com
080 41710149
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