अनोखा दहेज़

धनंजय कुमार

अनोखा दहेज़
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पाठक संख्या − 19901
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सारांश

डी एम बनते ही अभय के लिए रिश्ते आने लगे थे लेकिन अभय को शादी की कोई जल्दी नहीं पड़ी थी।एक से एक बड़े घर से रिश्ते आते और अभय मना कर देता था पिता जी कुछ नहीं बोल पाते।बहुत मान मनौवल के बाद एक साधारण परिवार में शादी तय हुई ।लड़की बी ए पास थी और नाम था शगुन; हालांकि वो आगे और भी पढ़ाई करना चाहती थी लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने की वजह से नहीं कर पायी थी और ऊपर से एक साल की डिंपल कौन संभालता ?डिंपल उसकी भतीजी थी;कुछ महीने पहले एक रोड एक्सीडेंट में भइया भाभी की मृत्यु हो गयी थी बस डिंपल ही भगवान् की दया से बच गयी थी ।अब उसकी देखभाल शगुन ही करती थी या यूँ कह लीजिये की शगुन ही उसकी माँ थी ।शादी की लगन पड़ गयी थी सो डी एम साहेब ने शगुन को एक मोबाइल खरीद के दे दिया था, बाते चीते होती रहती थी ।शगुन अभय से एक बात बताना चाहती थी लेकिन कह नहीं पाती थी , वैसे अभय ने भी काफी कोशिश की थी जानने की लेकिन वो डर के मारे टाल देती थी कि कही उसकी शादी ना टूट जाये।शादी के दिन नजदीक आते जा रहे थे ।लोग अभय की प्रशंसा करते नहीं थकते थे कि डी एम है लेकिन बिना दहेज़ की शादी कर रहे है ।
DEEPA SONI
बहुत भावनात्मक कहानी
Beena Awasthi
हृदयस्पर्शी भावपूर्ण कहानीः
Neelam Jangra
very nice...nd motivation story..
chitra
awwww so sweet .... beautiful story
Farha Khan
speech less awesome story no words 👏 👏 👏 👏 👏 👍 👍 👍 👍 👌 👍
Sangita Goyal
ydi esa ho jaye to hmara dhesh hi bdl jaye ati sundar story
Komal ahuja
ati sunder Katha. aaisi khaniya samaz may badlao laati hai
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