अनुत्तरित

अर्चना सिन्हा

अनुत्तरित
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सारांश

आज उसके यहाँ छोटी सी पार्टी है। जन्मदिन है उसका और दो दिन पहले उसे अप्वान्ट्मेंट लेटर भी मिल गया था। सो जन्मदिन की कम और नौकरी मिलने की खुशी में ज्यादा , पार्टी की जा रही है। कुछ उसके मित्र हैं, कुछ ...
Chintamani avasthi
बहुत बढ़िया ऐसे ही लिखते रहें
Deepika Vaishanv
ORT kitna bi samrpn kre aadmi use kbhi nhi smj skta
शुभा शर्मा
कहानी अति उत्तम है । उसका फैसला सामाजिक रूप से भले ही गलत हो, पर जो उसके साथ हो रहा है जो उसकी इच्छा से नहीं हो रहा ,तो अनिच्छा से कुछ भी करने के लिये स्वतंत्र है।कम से कम जीवन भर अपमान सहने से एक बार का अपमान ठीक है।
पाण्डेय अनिक
अप्रतिम, सराहनीय! यह परिस्थिति पुरूषों के साथ भी होती है लेकिन सौदा को देह नहीं। परिणामस्वरूप समझौता ही विकल्प बंचता है।
Pawandeo gupt
💞💟💟💟 Laajwab
ajay
दंश की पीड़ा रोज के ज़हर से भी खतरनाक हो सकती है।विद्रोह साहस से भरा हो केवल प्रतिशोध से नहीं।कहानी का अंत बार बार की पीड़ाओं की शुरुआत ही होगी।
arun singh
seems m reading manto..swal ye hai Jo hai usko waisa hi ku na Likha jaye.. indeed a best story.
Chanda Kumari
bitter truth of male chauvinism
Atul Sharma
very bold story,a lesson to male dominated society
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