अनावृत जिस्म

ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा

अनावृत जिस्म
(8)
पाठक संख्या − 331
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सारांश

यह कविता अनावृत जिश्म के रेखाचित्र में सच्चाई के बेपर्द होने की तस्वीर पेश करती है।
अंकित सोमवंशी
हृदय स्पर्शी रचना !!
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सरोज वर्मा
बहुत ही भावात्मक, आजकल की सच्चाई बयां करती रचना
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प्रभात पटेल
सुन्दर भाव
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आनन्द प्रकाश
बहुत खूब। 👌
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Lalita Mishra
Yah kawita kuchh hat ke hai. Anawrit Jishm, meaning a naked body of a women, summarises the impressions of people when they see the bared body of a woman...
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