अनकहा रिश्ता

संतोष भाऊवाला

अनकहा रिश्ता
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सारांश

अपूर्णताकृति बच्चे को गोद में लिए सोच रही थी, कितनी खुशकिस्मत है वह, उम्मीद ही नहीं थी या यों कहें, सपने में भी सोच नहीं सकती थी कि एक दिन बच्चा उसकी गोद में खेलेगा, उसे माँ कहेगा। यह सुख भी किस्मत मे
Swarn Lata Purohit
👏👏👌👌👌👌👌
shakun gautam
बहुत अच्छी और व्यावहारिक ...
Uttam Singh
अति सुंदर
Pushpa Lata
सुखद अंत
Anuradha Bhati
बेहतरीन रचना.. बेहद मार्मिक.. 🙏🏻
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