अधूरे सपने

Gaurav Kumar 'वशिष्ठ'

अधूरे सपने
(46)
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सारांश

आमतौर पर होटलों और ढाबों मे काम करने वाले छोटू घर के बड़े होते हैं, ज़िम्मेदारी नामक चुड़ैल उनका रक्तपान करती है। उन्होने परिवार के लिए क्या किया समाज इससे प्रेरणा नहीं लेता।
Asmi Srivastava
emotional story...
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Chhaya Singh
nice
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nisha
Bahut ache kahani hai
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Smayra Mandal
bahut khub
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ARUN GUPTA
master
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Akanksha Ahuja
Best lines.... Ye jo chhotu hote hain na ye apne ghar ke bade hote hain..... Ramadheen naam tumhare liye upyukt hai
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अनुराग
कहानी बहुत बढिया लाजबाब बस एक बात समझ नही आई की तेरह साल के किशोर से शादी विषयक प्रश्न क्यूं
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Dipti Kumari
sahi hai
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Shishir Kumar Pandey
सुर्खरू होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद। रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद। बेहतरीन रचना।
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nidhi Bansal
bht khoob
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