अधूरी मोहब्बत

रितेश कुमार सक्सेना

अधूरी मोहब्बत
(24)
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सारांश

प्रेम का एक, पुल बनाना चाहता था मैं, अपने और तुम्हारे दरमियाँ, ताकि कम हो सके, अंतर हमारे अंतरमन का, और पूरा हो जाये हमारा मिलना, पर बनने से पहले शंशय का एक तूफान उमड़ा, और उससे बनने से पहले ...
Rinki Kumari
bahut hi khubsurat.....
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Sudhir Kumar Sharma
अद्भुत
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Pooja Verma
very nice
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kiran
sundar rachna..
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अनुज कुमार कश्यप
संशय की स्थिति में प्रेम की सम्भावना कम हो जाती है। अच्छा है मेरे दोस्त कलम को हर रोज एक नई दिशा देने की कोशिश करे।
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bahut khub ritesh ji.....🌺
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चंचल चतुर्वेदी
bahut khubsoorati se likha he aapne zazzbato ko
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