अधूरी गृहणी

SURYA RAWAT

अधूरी  गृहणी
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सारांश

सविता ने अंकल जी वाला रूम खोला ..... और देखा तो हैरान रह गई पैरों तले ज़मीन धंसने लगी हो जैसे..... और चक्कर आने लगे । यकायक सविता ने...
Dhirendra Sen
bahut hi prerak wakyo se paripurn hai ye kahani
मौमिता बागची
विषय की नवीनता आपकी कहानी की ओर बरबस ध्यान आकर्षित करती है। मानवीय मन के सभी दशाओं का सही चित्रण और सेक्स पर इतना बेवाकी से लिख पाना बड़ा हिम्मत का काम है। बधाई आपको।
Upasna Mishra
कहानी की पकड़ अच्छी है ।पढ़ने वाले को बांधे रखती है। बहुत ही अच्छा लिखा है 👌👌
नितिन आर्य
बहुत अच्छी कहानी लिखी आपने। शुभकामनाएं
Chaman Negi
बहुत सुंदर रावत जी " फंडू फूक यार चटक फटक यख मवासी घाम लगदी मीजान आज " (आपकी रचना में ये विशेष पंक्तियों को पढ़कर प्रसन्नता हुई ) बहुत सुंदर रचना 💐💐💐
Anuradha Saxena
speechless 👌👌👌👌👌👌
Deepak Sharma
I think your story is copied from somewhere else with other name
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ruchi
बहुत ही अच्छी रचना , जब कोई व्यक्ति हद से ज्यादा महत्वाकांक्षी हो जाता है तो वह खुद को अकेला ही पाता है और उसका अंत ऐसा ही होता है नायिका की महत्वाकांक्षा ने उसे इस मोड पर ले आई
anchal singh
bht hi achhi kahani thi
Vijay Kumar
वाह मायानगरी और अभिनय जगत की अनछुए पहलू और एक कड़वी सच्चाई को बहुत ही बेहतरीन रूप से पेश किया आपने.. कामयाबी वही रास आती है जब आप बुलंदियों को जरूर छुए लेकिन कदम हमेशा जमीन से जुड़े रहे.... इस तरह की घटना के बाद काश तो होता ही है....
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