अधूरा वजूद

विनीता शुक्ला

अधूरा वजूद
(199)
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सारांश

अन्विता उदास सी बैठी थी. तानपूरे पर उंगली फिराकर, स्वर साधने की चेष्ठा; व्यर्थ गयी आखिर. मन में तो शलभ के ताने गूँज रहे थे, “महिला मंडल के कार्यक्रम में भाग ले लेतीं, तो कोई पहाड़ टूट पड़ता?” “तो ...
Vibha Jain
bahut he badiya... generally yahi hota hai sabkay sath
Pawan Agrawal
बहुत खूब
Khushboo Hindustani
प्रतिलिपि की सभी कहानियाँ बहोत अछी लगती है
नीता राठौर
बहुत सुंदर भावनात्मक अभिव्यक्ति
puneeta
bahut achhi kahani ...balki sachchai ke kareeb....working ho ya housewife aurat ke feelings ki kadra kam hi log kar paate hain ...khud aurat bhi aurat ke mahatva ko kam karti hai ....chahe wo beti ho bahan ho saas ho ya nanad ho
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madhu
beautiful story
Asha Jha
bahut sunder
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Varsha Sharma
काश ऐसी सहेली सी ननद सबको मिले ...nice स्टोरी
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