अधूरा बंधन

सोनाली

अधूरा बंधन
(37)
पाठक संख्या − 6128
पढ़िए

सारांश

एक सुखद रिश्ते का दुखद अंत...एक अधूरा बंधन
Deepak SINGLA
अछी रचना 💐💐शुभकामनाएं
Pawan Pandey
समय रहते सच का पता चल गया जिससे नायिका की जिंदगी भविष्य के दुख, तकलीफ, कष्ट से बच गया. वे दहेज लोभी परिवार आज के समय में दहेज प्रथा को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है, उनका चेहरा अंत में बेनकाब करना किया जाना था. कहानी लोगो में सार्थक संदेश देने वाली है. बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं.
Abhishek Alok
दहेज़ एक बीमारी
Sufiyan Bagwan
aaduri si hay ye kahani
ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा
आदरणीया सोनली जी, आपने बहुत सीधे और सरल शब्दों में एक ऐसी कहानी लिखी है, जिसकी पृष्ठ भूमि को लेकर कई कहानियाँ लिखी जा चुकी है। आपके कथ्य में प्रवाह है, इसलिये पढने में मन रम जता है। आप इस कहानी में नवीनता कैसे ला सकती हैं? आप पृत्युशा के अन्तर्द्वन्द्व को विषेष रूप से दिखाते हुये कहानी वहीं से शुरु कर फ्लैश बैक के द्वारा पूरी कहानी प्रस्तुत करें, तो थोडा और नया लग सकता है। और भी कई विचार हो सकते है, जिससे कहानी की प्रस्तुति में बदलाव लाया जा सकता है। वैसे आपका प्रयास प्रशंसनीय है। आप लिखती जांय, निखार आता जातेगा। आप इसी साइट पर मेरी रचनायें पढें और अपने विचार दाएं। आप marmagyanet.blogspot.com पर मेरा ब्लॉग भी विसिट करें और अपने विचार वहीं डालें। मेरी दूसरी पुस्तक उपन्यास के रूप में हिंद युग्म दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी है। इसका लोकार्पण जनवरी 18 में दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में हुआ था। इसके बारे में कुछ जानकारियां इस प्रकार हैं: मेरी लिखी दूसरी पुस्तक उपन्यास के रूप में "डिवाइडर पर कॉलेज जंक्शन" के नाम से हिंद युग्म से प्रकाशित हो चुकी है। पुस्तक के कथानक के बारे में: यह छोटे शहर में स्थापित ऐसे डिग्री कॉलेज की कहानी है जिसके पास से रेलवे लाइन गुजरती है। इसलिए विद्यार्थी अपने पीरियड के विषय से अधिक उस ओर से गुजरने वाली ट्रेन के समय की जानकारी रखते हैं। कॉलेज की पढाई करते - करते समय की गलियों से यूँ गुजरना। कुछ तोंद वाले सर, कुछ दुबले -पतले सर, कुछ चप्प्लों में सर, कुछ जूतों में सर। जैसे कॉलेज की दीवार से सटे रेलवे लाईन पर ट्रेनों का गुजरना। इसी बीच पनपता प्यार, विज्ञान और अर्थशास्त्र के बीच। छात्र परिषद के चुनाव की घोषणा होते ही बाहरी तत्वों के घुसपैठ से, कॉलेज के शान्त वातावरण का पुल - सा कम्पित होना, थर्राना। ये सब कुछ और इससे भी अधिक बहुत कुछ... पढें उपन्यास "डिवाईडर पर कॉलेज जंक्शन" में*** अभी यह आमज़ोन के साइट से ऑन लाईन मात्र 76रु में मँगाई जा सकती है। इस लिंक पर जाकर मंगाएं: link: http://amzn.to/2Ddrwm1 आमज़ोन पर customer review लिखें और मेरी लिखी पुस्तक "छाँव का सुख" डाक द्वारा मुफ्त प्राप्त करें। अपना पता मेरे ई मेल : brajendra.nath.mishra@gmail.com पर भेज दें। आप यूट्यूब के मेरे channel : BnmRachnaWorld Lit पर जाकर मेरी रचनाओं के ओडियो और वीडियो को देखें, लाइक करें और subscribe भी करें।
Jyoti Bharti
ghatiya mentality k log
SHashi BhusHan
kahani thik hai but climax aur achha ho sakta tha
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.