अतीत - एक नामुमकिन सच

केतन कोठारी

अतीत - एक नामुमकिन सच
(75)
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सारांश

प्रस्तावना जब ये कहानी लिखने बैठा, तब मन में कोई ठोस पृष्ठभूमि नहीं थी, क्या लिखना है, किस विषय पर लिखना है, कैसा लिखना है? कुछ तय नहीं था। पर जब भी लिखने बैठता अपनी ज़िन्दगी के कुछ लम्हें खुद ब खुद ख्यालों से कलम के जरिए कागजों पर उतरते चले गए। ये कहानी सम्पूर्णतः मेरी खुद की ज़िन्दगी की कहानी तो नहीं है पर ये कहना भी गलत नहीं होगा की कुछ हद्द तक ये मेरी ज़िन्दगी के अतीत से जुडी हुई है। ज्यों ज्यों कहानी आगे बढती जा रही थी, लिखने का मजा बढ़ते जा रहा था। ख़ुशी का हिस्सा बनती थी मेरी सखी, मेरी सबसे अच्छी दोस्त। कुछ लिखकर उसके साथ बांटता था, उसे सुनाता था और वो मुझे और प्रोत्साहित करती थी। लिखते लिखते वो भी इस कहानी का हिस्सा कब बन गयी पता ही नहीं चला। अपनी उस सखी को तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ, क्यूंकि उसके प्रोत्साहन, और मुझ पर विश्वास के बिना में इस कहानी को आप तक नहीं पहोंचा सकता। २ साल की लम्बी अवधि में सम्पूरित हुई, छोटी सी इस कहानी के अगले क्रम के बारे में सोचते, लिखते, इस कहानी का हिस्सा बनी मेरी ज़िन्दगी की हमसफ़र, मेरी अर्धांगिनी उर्मि। काफी कुछ उससे भी सिखने को मिला, मेरा मतलब है लिखने को मिला। प्रेम जैसे पवित्र रिश्ते पर अंकित इस कहानी में कहो तो कुछ नयापन नहीं है, और अन्य लेखको की तरह मैं ये नहीं कह सकता की मेरी कहानी सबसे हट के है, पर प्रेम जैसे विषय के साथ बिलकुल भिन्न कथानक पर आधारित है मेरी कहानी। सिर्फ ३ किरदारों के इर्द गिर्द घुमती इस प्रेम कहानी में कोई त्रिकोणीय प्रेम जैसी विषयवस्तु भी नहीं है पर प्रेम का दूसरा नाम त्याग है, की जनोक्ति को प्रमाणित करती है ये कहानी। आशा करता हूँ की अपनी कल्पना और ज़िन्दगी को जिस मेहनत से इन कागजों पर उतारा है मैंने, वो आपकी प्रशंसा और सराहना के काबिल होगी। अपनी पहली पुस्तक के बारे में वाचकों का अभिप्राय जानने का इच्छुक है ये अदना सा लेखक। कृपया अपने अभिप्राय, चाहे जो हो, जैसे हो, मुझे लिखे इस ई-मेल आई.डी पर: kketishk@gmail.com.
Chitra Cheena
बहुत ही अछि कहानी।
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Mohini Singh
khusurat khani... sabd km pr jaeynge iski tarif m.. akho m asu aa get..
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dheeru shukla
nice one
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Pallavi jain
it was really awesome....
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vikash kumar
very heart touching...........
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pragati chudasma
Suparab
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Amber Agarwal
Bhut acha likha hai
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ABHISHEK KUMAR
nice
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