अटूट बंधन

अनुपमा गुप्ता

अटूट बंधन
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सारांश

इस व्यस्त जीवन में, समय नहीं मिलता कि कविता लिख सकूँ! हर रोज तमाम कार्य कभी घर के कभी बाहर के, एक के बाद एक कार्य आते रहते है! कार्य होते रहते है और टलती रहती है कविता! सुबह बिस्तर छोड़ उठने से रात ...
Satyendra Kumar Upadhyay
"तमाम , फुर्सत " जैसे शब्द राष्ट्र भाषा ज्ञान दर्शा रहे हैं । अत्यंत सारहीन व अप्रासांगिक कविता है ।
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