अछूत

मणिराम मौर्य

अछूत
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सारांश

तब मैं पाँचवीं में पढता था,अपने बाल मित्र धनपत यादव के बाबा के ब्रह्मभोज में गया।दूर होने के कारण मैं साइकिल से जल्दी ही ही घर से निकला था ताकि जल्दी से मैं खाकर वापस आ सकूँ।आधे घंटे प्रतीक्षा के बाद ...
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