काली व डारावनी रात

शालिनी खरे

काली व डारावनी रात
(8)
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SUNIL DHAKA
बहुत अच्छी रचना
अंजलि खेर
शालिनी,,, कहानी बहुत ही प्यारी लिखी है तुमने
Raginee Gupta
आंखों के सामने चल चित्र सा, थोडा डर, लेकिन माता के दर्शन के बाद कुछ बुरा नहीं हो सकता ऐसा विश्वास तथा दूसरों की मदद से ईश्वर हमारी मदद करता है 👏👏बधाई👌👌
कल्पना भट्ट
वाकई परेशानी और डर का माहौल था । ईश्वर ने साथ दिया आपका । बहूत अच्छे से आपने आप बीती को लिखा है । हार्दिक बधाई शालिनी जी ।
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