स्त्रीत्व मरता कब

सविता मिश्रा

स्त्रीत्व मरता कब
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सारांश

पुलिस अपने कामयाबी पर फूले नहीं समा रही थीं और नक्सली लड़कियां मंद- मंद मुस्करा, त्रियोचरित्र सपने बुन रही थीं | उन चंद क्षणो में हजारों सपने देख डाले होंगे उन्होंने |
satish kumat
Bahut sunder kalpna
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Vikas
एक अलग सोच पर लिखी अच्छी कहानी.
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