भूपेन्द्र
मै समझ नहीं पा रहा हूँ की कोई किसी शहीद की विधवा के प्रति ऐसी सोच रख कर कैसे लिख सकता है , बकवास
Vivek
bahut hi shandar
Usha
bahut hi sundar kahani Hai ..dil ko chhu gyi
Sangita
Bahut hi achchi or emotional story.
नीरज
अपने अपने स्वार्थों ने जोड़ रखा था संबंंधोंको। बहुत खूब
Shiv Nath
मर्मस्पर्शी।
Chander
हे ईश्वर, इतनी अंतर्वेदना
Suman
जवाब नहीं संतोष जी आपका
पवित्रा
अच्छी कहानी संतोष जी,बधाई ।
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