प्रेम और पश्चाताप

संजय कुमार शर्मा "प्रेम"

प्रेम और पश्चाताप
(14)
पाठक संख्या − 6366
पढ़िए

सारांश

संयोग, वियोग और पश्चाताप कहानी का मूल है! - बारिश की चंद बूंदों ने कविता के सौन्दर्य को और बढ़ा दिया था। उधर इस बर्फानी जगह पर बारिश में भीग कर प्रेम काँपने लगा परन्तु कविता के सौन्दर्य की तपन ने उसे सम्भाले रखा। कविता के सिर से होकर उसके होठों को छूती हुई यौवन पर से सरकती बूंदें प्रेम को कामपीड़ित कर रही थी।
Sangita Sharma
Sukhad ant
रिप्लाय
Namrata Thakur
ठीक
रिप्लाय
Garima Panwar
Bhut accha end kiya story ka Happy ending
रिप्लाय
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.