प्रेम और पश्चाताप

संजय कुमार शर्मा

प्रेम और पश्चाताप
(18)
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सारांश

संयोग, वियोग और पश्चाताप कहानी का मूल है! - बारिश की चंद बूंदों ने कविता के सौन्दर्य को और बढ़ा दिया था। उधर इस बर्फानी जगह पर बारिश में भीग कर प्रेम काँपने लगा परन्तु कविता के सौन्दर्य की तपन ने उसे सम्भाले रखा। कविता के सिर से होकर उसके होठों को छूती हुई यौवन पर से सरकती बूंदें प्रेम को कामपीड़ित कर रही थी।
Ambar Sharma
70 or 80 ke time ki hindi movie ki story lag rhi h
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Sangita Sharma
Sukhad ant
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Namrata Thakur
ठीक
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Garima Panwar
Bhut accha end kiya story ka Happy ending
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