मां और गरीबी #ओवुमनिया

वो मां थी जो इतनी गरीबी में भी हमें पालती रही....
अपने आसुंओ का निवाला बना- बना कर हमारे अदंर डालती रही,,,,।

गरीबी इतनी थी,पर उसने हमें कभी रोने ना दिया.....
आप रही भूखी पूरा- पूरा दिन,पर हमे कभी भूखा सोने ना दिया....
आप सभंली नहीं आज तक पर फिर भी ता-ऊमर हमें सभांलती रही....।
वो मां थी............।

वो सब काम खुद करती है,ताकि हमें पढ़ा सके.....
जिदंगी में इतने दुख देख कर भी हसती है,ताकि हमें आगे बढा सके.....
आप फटे-हाली में काटी जिदंगी ,पर हमारे शुभ जीवन के लिए खाक छानती रही...।
वो मां थी.......... ।

तुझे फरिश़ता कहूं या परमातमा समझ नहीं आता.....
अब इस ललित के मन को भी तेरे आचंल के शिवा कुछ और नहीं भाता....
नहीं भूल सकता वो गलीयां जो तु मेरे लिए खगांलती रही.....।
वो मां थी..........।

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