स्त्री जीवन #ओवुमनिया

जीवन का हर पल कैसे लिख दूं कुछ शब्दों मे,
मैं कैसे बिखरा दूं वो सारे पन्ने,
जो अब तक समेटे चली आ रही हूं,
बिना किसी से शिकायत के सहती चली  रही हूं,
स्त्री ही तो हूं मैं ......

जीवन में सबसे ज्यादा जिसको जिया मैंने,
स्त्री होने का अहसास हर पल लिया मैंने,
जीवन का हर वो पल अब  बीत चुका है,
जब हर बात पे दिल को अपने समझाया मैंने,
स्त्री ही तो हूं मैं.....

हां हूं स्त्री इसीलिए जीती चली आई एसी जिंदगी,
जो मेरे लिए मैंने मांगी नहीं थी,
हां स्त्री ही हूं इसीलिए निभाती चली आई ताउम्र ,
वो रिश्ते जो मुझ पर थोपे गए थे,
बस एक सवाल स्त्री होकर पूछना चाहती हूं,
जीवन यूं ही होता गर स्त्री नहीं पुरुष होती मै..

बस पूछ ही रही हूं क्योंकि..
स्त्री ही तो हूं मैं......

hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.