वापसी #ओवुमनिया

     वो मासूम सी परी अंजली ( गोपनीयता की दृष्टि से नाम बदला गया है ) माँ का आँचल तभी खो बैठी जब उसे पता भी न था कि मौत क्या होती है। चन्द महीने भी न बीते थे कि गाँव के बुजुर्गों ने उसे एक नयी माँ की गोद में डाल दिया। उसके पिता बिलकुल भी नहीं चाहते थे कि बच्चों के लिए सौतेली माँ को घर में ले आए किन्तु मासूम बच्चों को कम से कम रोटी तो नसीब होगी, बस इसी सोच ने उनका मुँह बन्द कर दिया। ये नयी माँ कौन सा सैलाब लाने वाली है , सम्भवतः ये तो वो खुद भी नहीं जानते होंगे।
    13 साल की अंजली इस नयी माँ द्वारा उसके दोगुने उम्र से भी ज्यादा आयु के व्यक्ति से ब्याह दी गयी। अरे! ब्याह क्या दी गई दरअसल कुछ पैसों के लिए बेच दी गयी थी, तिस पर कमाल ये कि बाप-बेटी को इसका इल्म भी नहीं हुआ। गुड्डे- गुड़ियों का खेल खेलने की उम्र में वो खुद एक बेटी की माँ बन गयी। अभी वो अपने बालमन पर पड़े इस आघात से उबर भी न पायी थी कि 18 साल की होते होते उसकी गोद में एक और बेटी ने दस्तक दे दी। परिस्थितियों से जूझते और अपने वज़ूद की अहमियत को समझते-समझते वो मानसिक रूप से इस कदर टूट चुकी थी कि एक दिन उसने ससुराल की दहलीज लाँघ दी और जा पहुँची अपनी नानी के घर। सौतेली माँ, अत्याचारी ससुराल और पति के मौन ने उसे शारीरिक एवं मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया था कि उसने एक कठोर फैसला ले लिया। अब वो जिंदगी से पूरी तरह हार चुकी थी। फैसला अडिग था सो रात में सोती हुयी अपनी मासूम बेटियों को छोड़कर कुएँ में छलाँग लगाने की उसकी असफल कोशिश को नानी के झन्नाटेदार थप्पड़ों ने नाकाम कर दिया। अंजली की नानी ने उसकी दोनों बेटियों का भविष्य उसके सामने रक्खा। उसे सोचने पर मजबूर कर दिया। क्या  " उसकी मौत उसकी दोनों मासूम बेटियों के लिए प्रताड़ना भरी जिंदगी की शुरुआत नहीं है ? " ये एक नई सुबह का आग़ाज़ था।
    समाज और परिवार द्वारा मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़नाऐं सहने के बावजूद आज अंजली अपनी बेटियों का सुन्दर भविष्य गढ़ने में सफल हुयी है और सिर्फ अपनी बेटियों का ही नहीं बल्कि अनेकों ऐसी महिलाओं का भविष्य संजोया है जो परिवार एवं समाज द्वारा प्रताड़ित की गईं थीं। अंजली एक NGO  के साथ लगभग 20 साल से जुड़ी है और अपने सफल प्रयासों के लिए अनेकों पदकों से सम्मानित की जा चुकी है।
    दोस्तों! शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़नाओं के इस वृहद सागर को पारकर कोई कैसे खुद को इस भँवर से निकालता है, ये तो बड़ी बात है ही लेकिन अपने जैसी सैकड़ों लड़कियों और महिलाओं को इस दलदल से निकालकर एक बेहतरीन भविष्य देना, कोई छोटी बात नहीं है। मेरा शत-शत नमन है अंजली को।
      ( अंजली का किरदार मेरी अपनी ज़िन्दगी से 12 सालों से जुड़ा है। मेरे लिए अंजली को नमन करने का इससे अच्छा सौभाग्य क्या होगा ? )
                                          
                                          नीलिमा कुमार

     
    

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