कलेक्टर बिटिया #ओवुमनिया

सुनीता पढ़ने लिखने में बहुत तेज़ थी और कलेक्टर बनना चाहती थी,किन्तु उसके पिता को शराब पीने की बुरी लत थी.खुद तो कुछ काम धाम नहीं करता था,उसपर उसकी माँ सिलाई का काम करके जो चार पैसे इक्कट्ठा करती वो भी उससे मारपीट कर छीन लेता और दारू में उड़ा देता था.कभी कभी तो स्कूल की फीस देने के भी पैसे भी नहीं होते थे.उसकी माँ किसी से पैसे उधार लेकर जैसे तैसे फीस भरती थी.
आज सुनीता स्कूल से आई तो देखा,कि माँ के सिर से बहुत खून निकल रहा था और वह रो रही थी.
"माँ,क्या हो गया तुझे?
"कुछ,नहीं बेटा वो बस पैर फिसल गया था,सो सिर में लग गई ''
सुनीता समझ गई थी,कि माँ झूठ बोल रही है.बापू ने ही मारपीट की होगी.
अब तो आए दिन सुनीता का बाप शराब पीकर आता और उसकी माँ को मारता.वह रोकती तो उसपर भी हाथ उठाता.उसका स्कूल जाना भी बंद करवा दिया.
सुनीता बहुत उदास रहने लगी.उसकी माँ को भी उसके भविष्य की चिंता सताती लगी.
सुनीता स्कूल की होनहार छात्रा थी अतः उसके स्कूल न आने पर,क्लास टीचर रमा को भी बहुत चिंता हुई.वह उसे बहुत प्यार करती थी.एक दिन स्कूल से सीधा सुनीता के घर चली गई.सुनीता टीचर को देखकर खुशी से चिल्लाई -" माँ,देखो टीचर जी आईं हैं"
माँ ने रमा को आदरपूर्वक बिठाया और टीचर के पूछने पर,कि सुनीता स्कूल क्यों नहीं आ रही सब कुछ विस्तार से बता दिया.तभी सुनीता का पिता वहाँ आ गया.
रमा बोली-"देखिए,भाई साहिब आप इस तरह होनहार बच्ची को घर बैठाकर उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहें हैं"
"देखिए,मेडम जी हमारे पास इसको पढ़ाने के लिए पैसे नहीं हैं,आपको इसकी ज्यादा चिंता है तो आप इसको अपनी बेटी बना लो और जितना पढ़ाना चाहो पढ़ाओ " सुनीता का पिता गुस्से से बोला
"ठीक है,भाई साहिब आज से सुनीता मेरी बेटी है और इसको मैं पढ़ाऊंगी"
रमा की बात सुनकर,सुनीता बहुत खुश हुई और उसे गले लगा लिया.फिर माँ से बोली-
"माँ,अब मैं ख़ूब मेहनत करूँगी और पढ़ लिखकर बड़ी अफसर बनूँगी.फिर तेरो को नाही मशीन चलाने चलानी पड़ेगी और न रोज रोज बापू की मार खानी पड़ेगी"

रमा ने अपना वादा निभाया और सुनीता को पढ़ा लिखाकर कलेक्टर बनाया.

अब सुनीता के लिए रिश्ते आते हैं,तो उसका पिता बड़े गर्व से कहता है-"हमारी बिटिया कलेक्टर है"

कमलेश आहूजा
मुम्बई(महाराष्ट्र)

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