अनसुलझे रहस्य या कोई पहेली......भाग 13

अनसुलझे रहस्य या कोई पहेली   का भाग 1 से 12 तक प्रकाशित किया जा चुका है।

अब आगे........


सम्राट का आशीर्वाद लेकर हम दोनो धरती की ओर रवाना हुए पर मेरा मन बड़ा ही व्याकुल था। यहाँ मेरे साथ राजकुमारी थी जो मेरे साथ जिवन बिताने के लिए अपना राजमहल, और सभी सुख सुविधाओं को त्याग करके मेरे साथ धरती पर रहने के लिए तैयार थी। उसनें अपने आँखों मे न जाने कितने सपने सजों रखे थे। दूसरी तरफ नम्रता भी बिना स्वार्थ के मेरे परिवार की सेवा कर रही थी। उसे भी मेरे साथ जिवन बिताने की आश है। नम्रता जितना प्रेम मुझसे करती है उतना ही प्रेम मेरे परिवार से भी करती है। नम्रता को यह पता है कि मै राजकुमारी से प्रेम करता हूँ पर राजकुमारी को यह नहीं पता कि नम्रता भी मुझसे प्रेम करती है। बड़ी ही मुश्किल मे फँसा था। क्योंकि मै दोनो को ही खोना नहीं चाहता था। पर करू भी तो क्या? राजकुमारी ने मेरी ओर देखा और कहा, योगेश किस चिंता मे डूबे हुए हो? चिंता मत करो मै सब ठिक कर दूगीं। बस तुम घर चलो तुम्हारे सभी मुशिबत का हल मे ही हूँ। मै कैसे निश्चिंत हो सकता था। असली डर तो अभी शुरू हुआ था। क्योंकि धरती वासीयों को सबसे अधिक डर परिवार मे होने वाले झगड़े और समाज का रहता है। बस कुछ ही देर मे हम समुंद्र से बाहर निकले। हमने एक दूसरे का हात पकड़ा और उड़न छू होकर सीधे घर पहुंच गए। घर आने पर देखा तो मेरे होश उड़ गए। घर मे कोई नहीं था। हमनें यहाँ वहाँ देखा, पूरे घर मे जाँच की पर कोई नहीं था। राजकुमारी ने कहा, ये कौन सी जगह है?यह किसका घर है? तुम्हारा घर तो कहीं और था। मैने कहा, यह भी मेरा घर है और तुमसे अलग होने के बाद मैं यहीं रहता था। तुम्हें लेने गया तब सभी को यहाँ रख के गया था पर अब कोई दिखाई नहीं दे रहा। राजकुमारी रसोई घर मे गई और लौटकर आई। राजकुमारी ने कहा डरो मत भोजन गरम है मतलब सभी बाहर गए हैं। उन्हें कुछ नहीं हुआ। जब तक वो लौटकर आते हैं तब तक हम अपने यह कपड़े बदल लेते हैं। नहीं तो उन्हें हमारे बारे मे सब मालूम हो जाएगा कि हम कोई सामान्य नहीं हैं। मैने कहा, पर मैने तो अपने परिवार को बता दिया था कि मेरे पास जादुई शक्तियां हैं। राजकुमारी ने कहा, अगर उन्हें यह पता है तो उनके साथ नहीं रह पाएंगे क्योंकि वह हमसे हमेशा डरकर ही रहेंगे। मैने कहा, तो क्या तुम्हारे पास इसका कोई उपाय है। उसने कहा, हाँ है पर उन्हे आने दो पहले। मैने कहा, ठिक है। हम वहीं उनका इतंजार करने लगे। तभी उनके आने की आहट हुई। उन्होंने झट से दरवाजा खोला। हम दोनो सामने ही बैठे हुए थे। मै भागकर मम्मी के पास गया। मेरी दोनो मम्मी मेरे सामने थे। एक मम्मी जो जिसने मुझे जन्म दिया और दूसरी मम्मी जिसने मुझे बचाकर मुझे नया जीवन दिया। दोनो के आँखों मे पानी था। मैने कहा, अब क्यों रो रहें हो। मै आ गया ना वापस। मेरी मम्मी ने कहा, बेटा तेरे आने की खुशी मे है। मै नम्रता के पास गया। नम्रता ने कहा, तुम ठिक हो ना और राजकुमारी का क्या हाल है? मैने कहा, तुम खुद ही देख लो। नम्रता ने कहा, अब क्या विचार है? मुझे कब अपने घर विदा करोगे। मैने कहा, मै तुम्हें क्यों विदा करू। अब तुम मेरे पास ही रहोगी। मेरे साथ हमेशा के लिए। तुम्हें वचन दिया था ना कि तुमसे कभी अलग नहीं होउंगा। नम्रता ने कहा, फिर राजकुमारी का क्या होगा? तुम उससे तो बेहद प्यार करते हो। मैने कहा, जब मुझे दो मम्मी का प्यार मील सकता है तो क्या मुझे दो सुदंर प्रेमिकाओं का प्यार नहीं मील सकता। राजकुमारी ने आगे आकर कहा, हमारे यहाँ एक राजा की बहुत सी रानीयाँ रहती है मै चाहे तो अपना प्रेम तुम्हारे साथ बाट सकती हूँ। मैने कहा, प्यार बाँटने की जरूरत नहीं मै तुम को समान प्रेम करता हूँ। नम्रत हँस कर कहा, मुझे मंजूर है। मैरी बहनों ने खुशी से उनके हात पकड़कर कहा, चलो अच्छा है हमें भी दो भाभी का प्रेम मिलेगा। मम्मी ने कहा, बेटा यहाँ इतनी महँगाई मे एक परिवार नहीं चला सकते उसमें तु दोनो का खर्च कैसे संभालेगा। मैने कहा मम्मी तु खर्च की और घर चलाने की चिंता मत कर और रह गई मंहगाई तो उसे तो अब मेरा सामना करना होगा। हम सभी हँसने लगे और भोजन करके सोने चले गए। क्योंकि बहुत दिन हो गए थे धरती की सुबह देखे।

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यह मेरे कहानी का अतींम पार्ट है। आप लोगों ने इसे पढ़ने मे रूची दिखाई इसलिए मैने लिखने मे रूची दिखाई।

योगेश माली
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