खूबसूरत

उसके सुंदर चेहरे को उपमा से अलंकृत करना चांद की चांदनी में तारों का टिमटिमाना जैसा ही था वह प्रतिदिन अपने घर की खिड़की मैं बैठी शून्य में झांकती ही रहती उसकी झील सी गहरी आंखें जड़वत थी ।प्रकाश प्रतिदिन अपने ऑफिस जाते समय और वापसी में उसे वहां बैठे देखता ।वह अपने घर की ऊपरी मंजिल की खिड़की में तन्हा बैठे ही रहती। प्रकाश के मन में उसके प्रति जिज्ञासा थी कि क्या वह अकेली क्यों है, वह शून्य में क्या देखती है। प्रकाश रोज कोशिश करता वह अनजान अजनबी बुत सी लड़की कभी उसकी और देखें किंतु उसके सारे प्रयास विफल थे एक दिन प्रकाश ने एक पत्र लिखकर उसे एक छोटे से पत्थर से बांधकर उसकी खिड़की की ओर उछाल दिया पत्र खिड़की से टकराकर अंदर की ओर गिरा प्रकाश ने पीछे मुड़कर देखा लड़की उसकी आंखों से ओझल थी।
प्रकाश उसके पत्र के इंतजार में उसके घर के आसपास भंवरे की तरह मंडराता ही रहा किंतु उसका प्रयास व्यर्थ था ।उसे प्रत्युत्तर नहीं मिला। प्रकाश का इंतजार बस इंतजार ही रहा कुछ दिनों तक वह लड़की खिड़की में नजर ही नहीं आई प्रकाश उदास और निराश था इसी तरह कई दिन बीत गए एक दिन प्रकाश की नजरें खिड़की पर पड़ी फिर वही सुंदर चेहरा शून्य में झांकता हुआ वह खिड़की में बैठी थी। प्रकाश के सब प्रयास निष्फल थे। एक आशिक लड़की को लुभाने के लिए जो कुछ कर सकता था। वह प्रकाश ने किया किंतु उस लड़की के चेहरे के भावों में कोई परिवर्तन नहीं आया हां इतना अवश्य हुआ कि वह लड़की कभी-कभी प्रकाश की ओर नजरें इनायत कर देती थी।  किसी ने ठीक ही कहा है कि जिस से मोहब्बत करते हो उसके अधिक से अधिक नजदीक रहने का प्रयास करो। उसकी यदा कदा नजरों ने प्रकाश की हौसला अफजाई की प्रकाश ने सोचा कि क्यों न लड़की के घर चला जाये।
वह दोपहर के लंच के समय में उस लड़की के घर की और पहुंचा वह खिड़की में बैठी थी उसने प्रकाश को देखा दोनों की निगाहे टकराई उसने उसे अंदर आने का इशारा किया और प्रकाश उसके घर की सीढ़ियां चढ़ने लगा वह कुछ सहम गई, उसके चेहरे पर वेदना के भाव थे। प्रकाश ने घर के दरवाजे पर पहुंचकर दरवाजे पर लगी नेमप्लेट को देखा उस पर अंकित था मिस्टर एंड मिसेस नामजोशी शासकीय महाविद्यालय
प्रकाश ने कॉल बेल बजाईअंदर से लड़की की मधुर आवाज आई" कौन है" " जी मैं हूं" " आप कौन हैं और क्या चाहते हैं अभी घर में कोई नहीं है मम्मी डैडी कॉलेज गए हैं" अंदर से आवाज आई! आपने   मेरे पत्र का जवाब नहीं दिया इसलिए आपकी दहलीज़ तक आने को मजबूर होना पड़ा।" देखिए आप जो समझ रहे हैं, वह बात नहीं है ,आप प्यार की परिभाषा ही नहीं समझते हैं, प्लीज मेरा पीछा छोड़ दीजिए, वैसे भी मैं आपके लायक नहीं हूं"! उसके स्वर में करुणा थी ।आप दरवाजा खोलिए" मैं आपके मुंह से ना सुनना चाहता हूं यदि, आप ने मेरे प्यार को ठुकरा दिया तो मैं आपको कभी मुंह नही।दिखलाऊंगा" प्रकाश बोला! प्लीज मेरा पीछा छोड़ दे
नहीं तो मैं शोर मचा दूंगी" अंदर से लड़की की कठोर आवाज आई! प्रकाश चुपचाप गर्दन झुकाए निराश भाव से उसके घर की सीढ़ियां उतरने लगा ।वह अंदर बैठी उसकी पदचाप सुन रही थी प्रकाश का नीचे जाता एक एक कदम उसके हृदय की धड़कन को बढ़ा रहा था ।जब प्रकाश के कदमों की आवाज बंद होते-होते गायब हो गई वह जोर से सिसकियां मर रही थी।
प्रकाश भारी मन से अपने घर लौट आया घर आते ही धम्म से सर पकड़ कर बिस्तर पर लेट गया प्यार में ठुकराए जाने की टीस उसके दिल में बार-बार उठ रही थी ।उसके जैसे स्मार्ट और योग्य लड़के को ठुकराया जाना उसके लिए आत्ममंथन का दौर था। वह विचारों के जंगल में खो गया विचारों के जंगल में कुतर्कों की गाजर घास अपने आप ही उग आती है कुतर्कों की यह गाजर घास सत्य को पार्श्व में धकेल देती है ।प्रकाश के मस्तिष्क में शंकाओं का एक दौर चल पड़ा कभी वह सोचता कहीं वह लड़की विधवा तो नहीं है कहीं उसके साथ ऐसी कोई दुर्घटना तो घटित नहीं हुई जिससे वह मानसिक रूप से आहत होकर जड़वत हो गई ।विचारों के जंगल में उलझते उलझते कब प्रकाश को नींद आ गई पता ही नहीं चला। सुबह चिड़िया की  चहचहाहट में उसकी नींद टूटी उसका सर भारी था। मां बोली" प्रकाश आजकल तू बहुत ही उदास लगता है ,क्या बात है"! नहीं मां कुछ नहीं प्रकाश ने चाय का  घूट भरते हुए कहा।" "रात को भी सपने में कुछ बोल रहा था क्या बात है", बेटा अपनी मां से छुपायेगा" मां बोली !नहीं मां" ऐसी कोई बात नहीं है ,तुम्हारे सिवा मेरा और कोई है क्या इस दुनिया में ,प्रकाश की आवाज में कंपनी था !चल जल्दी से नहा ले मैं तेरे लिए नाश्ता तैयार कर देती हूं" मां बोली। नाश्ता करते समय भी प्रकाश उसी के बारे में सोच रहा था उसके मन मस्तिष्क की गहराइयों में वह इस तरह समा गई थी। जेसे फूलों में खुशबू बार-बार उसका अक्स उभरकार प्रकाश के सामने आता। उसके दरवाजे ना खोलने की घटना ने प्रकाश को झकझोर दिया ।आखिर क्या कमी है उसमें । प्रकाश ने पुनः एक पत्र उसको लिखा।
             प्रिय,
मैं तुम्हारा नाम तक नहीं जानता हूं। फिर भी ह्रदय की गहराइयों से तुम्हें प्यार करता हूं ।तुम एक फूल हो और इस फूल की महक से मैं अपने घर आंगन को महकना  चाहता हूं। मैं तुम्हें यूं ही खिड़की में बैठे-बैठे मुरझाते हुए नहीं देख सकता हूं। यदि तुमने मेरे पत्र का जवाब नहीं दिया तो यह टीस मुझे आजीवन रहेगी।
                                              प्रकाश
प्रकाश ने पहले की तरह ही उस पत्र  को उसकी खिड़की में फेंक दिया। वह आज प्रकाश की ओर देख कर पहली बार थोड़ी सी मुस्कुराई उसकी मुस्कान ने प्रकाश के हृदय की धड़कन तेज कर दी। वह बैठे-बैठे ही पीछे हटी ।उसने पत्र को उठाया और पढ़ने लगी। प्रकाश ज्यादा देर  न रुककर अपने ऑफिस चला गया। शाम को जब वह घर लौटा तो उसे खिड़की में ही बैठा पाया ।प्रकाश को देखकर वह फिर मुस्कुराई और उसने ऊपर से एक पत्र नीचे की ओर फेंक दिया प्रकाश ने चारों ओर मुआयना करते हुए पत्र उठाकर जेब में रख लिया और लंबे लंबे डग भरता हुआ धड़कते दिल के साथ घर लौट आया।
         प्रकाश जी।
आपने फुल की पंखुड़ियों की सुंदरता ही देखी है, उसकी महक से ही परिचित हो ,परंतु उसके नीचे चुभ ने वाले कांटो का एहसास तुम्हे नहीं है। कुछ फूल ऐसे भी होते हैं जो दिखने में ही सुंदर होते हैं उनमें न तो महक होती है और ना ही वह देवताओं देवताओं के चरणों में चढ़ाए जाते हैं। सुंदरता वस्तु में विद्यमान है या दृष्टि में यह विवाद का विषय हो सकता है ।किंतु मन की सुंदरता और विचारों की सुंदरता को कोई नहीं देखता। यहां सब बाह्य सोंदर्य से ही प्यार करते हैं, जो नश्वर है अस्थाई है। पूर्णिमा के चांद को सब चाहते हैं किंतु जब उसे चांद को ग्रहण लगता है तो उसे कोई नहीं देखता है मेरी जिंदगी में भी ग्रहण लगा है। इसके बाद भी यदि तुम मुझे चाहते हो तो कल मेरे घर आ सकते हो।
                                            प्रमिला।

प्रकाश पत्र पढ़कर मन ही मन प्रसन्न हुआ वह उसके ही सपनों में खो गया सच ही कहा है इंतजार करने वाले को एक-एक पल एक-एक युग के समान लगता है ।वह सोचने लगा कब सुबह होगी और पहुंचेगा वह अपनी प्रेयसी के सामने कब पलकों में नींद आ गई और सपनों में समा गई। उसे पता ही नहीं चला चिड़िया चहचहाहट ने उसकी नींद को तोड़ा ।वह ब्रश और टावेल लेकर सीधा ही बाथरूम में चला गया। क्या बात है बेटा" आज इतनी जल्दी नहा कर कहीं जाना है क्या, आज तो छुट्टी है" मां ने कहा|" हां मां एक दोस्त के यहां जाना है! "ठीक है मां ने कहा और वह अपने काम में व्यस्त हो गई प्रकाश अच्छी तरह तैयार होकर उसके घर की ओर चल पड़ा रास्ते पर वह उसकी कल्पनाओं में ही खोया रहा !उसका ह्रदय जोर से धड़क रहा था वह मन ही मन सोच रहा था कैसे बात करेगा उससे! विचारों का जंगल कब समाप्त हो गया और उसका घर आ गया प्रकाश धड़कते दिल से उसके घर की सीढ़ियां चढ़ने लगा प्रत्येक सीढ़ी चढ़ने के साथ ही उसकी धड़कन तेज हो जाती दरवाजे पर पहुंचते ही उसने कॉल बेल बजाई अंदर से उसकी मधुर आवाज आई "कौन है "जी मैं प्रकाश" उसकी मां ने दरवाजा खोला! प्रकाश ने उनसे अभिवादन किया वह बोली आओ बेटा !प्रकाश ने जैसे ही घर के कमरे में कदम रखा तो वह स्तब्ध रह गया उसके सपने चूर चूर हो गए। एक ही पल में। वह व्हील चेयर पर बैठी थी। उसके बिस्तर के समीप ही उसकी बैसाखी रखी हुई थी प्रकाश तो बस अंधकार में चला गया वह मुस्कुराई और बोली" अब बोलो क्या तुम्हारा प्यार सिर्फ मेरे खूबसूरत चेहरे से ही था" प्रकाश की तंद्रा टूटी और वह बोला" नहीं ऐसी कोई बात नहीं है सुंदरता चेहरे से नहीं ह्रदय से आती है, मैं तुम्हें से प्यार करता हूं" यह जानते हुए भी कि" मैं किसी का सहारा नहीं बन सकती हूं "वह बोली!" यदि यह सब कुछ शादी के बाद घटित होता तो क्या मैं तुम्हें छोड़ देता" कहतें हुए प्रकाश ने उसे व्हील चेयर से उठाकर अपनी बाहों में भर लिया। और उसकी आंखों से आंसुओं का झरना फूट पड़ा और उसने प्रकाश की बाजुओं को सराबोर कर दिया।

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