चक्रव्यहू (8th Part)

        "क्या हुआ हर्षित, तुम कुछ बोल क्यूँ नहीं रहे हो ?" निहारिका ने सोफे पर अपने बगल में गुमसुम बैठे हर्षित से पूछा।

        "कुछ नहीं हुआ बुआ, मैं आज काॅलेज के बाद अपने क्लब की टीम के साथ कल के एक इम्पाॅर्टेंट मैच की प्रैक्टिश करने चला गया था, इसलिए थोड़ा-सा थका हुआ हूँ और इस वजह से हीं आपको ऐसा लग रहा होगा कि मैं परेशान हूँ बट ऐसी कोई बात नहीं हैं।" हर्षित ने अनमने ढंग से जवाब दिया।

        "बेटा, तुम आठ साल के थे, तबसे तुम्हारी एक्टीविटिज नोट कर रही हूँ इसलिए मैं तुम्हारा चेहरा देखकर जान जाती हूँ कि तुम खुश हो या दुखी। साथ हीं ये भी जान जाती हूँ कि तुम सच बोल रहे हो या झूठ। जानते हो कैसे ?"

        "नहीं।"

        "तुम खुश होते हो तो सामनेवाले के चेहरे की ओर देखकर बातें करते हो और दुखी होते हो तो बात करते समय तुम्हारी नजरें कहीं और होती हैं। अब मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुम सच बोल रहे हो या झूठ, ये मैं कैसे जान लेती हूँ। एक्चुअली, तुम जब सच बोलते हो तो सामनेवाले की आँखों में आँखें डालकर बातें करते हो और तुम्हारी बातों में सेल्फ-काॅन्फिडेंस भी झलकता हैं जबकि तुम झूठ बोलते हो तो दाएँ-बाएँ देखकर बातें करते हो और तुम्हारी बातों में काॅन्फिडेंस बिलकुल भी नजर नहीं आता। एम आई राइट ?"

       "बुआ, ये आपका कोश्चन बिल्कुल नाॅनसेंस हैं क्योंकि आप कभी कोई रांग बात बोलती हीं हैं। मैंने आपके जैसी ग्रेट पर्सन अपनी पूरी लाइफ में नहीं देखी। अरे, आप तो मेरे लिए बचपन में सुनी गई कहानी की उस परी की तरह हैं जो एक बच्चे को दुखी देखकर अपना परीलोक छोड़ देती हैं और अपना पूरा जीवन उस बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए समर्पित कर देती हैं। मुझे आपका साथ बिलकुल उस परी की तरह ही लगा। बचपन में मुझे आपके साथ की जरूरत थीं जो युवावस्था तक पहुँचते-पहुँचते आदत में बदल चुकी हैं, इसलिए मैं आज दिनभर से सोच-सोचकर पागल हो गया हूँ कि मैं आपके साथ के बिना कैसे जी पाऊँगा ?"

         "ऐसा क्यूँ बोल रहे हो ? तुम मेरा साथ छोड़कर कहीं जा रहे हो क्या ?"

          "हाँ बुआ।"

          "व्हाट ?"

          "मैं समझ सकता हूँ कि ये बात सुनकर आपको कितना गहरा शाॅक लगा होगा। मुझे भी आपसे ये कहते हुए अच्छा नहीं लगा और न हीं आपका साथ छोड़ना मुझे अच्छा लग रहा हैं, बट मुझे जाना हीं होगा।"

          "हर्षित, ये तुम कैसी बहकी-बहकी बातें कर रहे हो ? अरे, तुम्हें इस तरह अचानक कहाँ जाने की जरूरत पड़ गई ?"

           "मैं आर्मी ज्वाइन करना चाहता हूँ।"

           "ये अचानक आर्मी ज्वाइन करने का फितुर तुम्हारे दिमाग में कहाँ से आया ?"

           "अचानक नहीं बुआ, मेरी बचपन से हीं आर्मी ज्वाइन करके देश की सेवा करने की तमन्ना हैं।"

           "पर तुमने मुझे तो कभी अपनी इस तमन्ना के बारे में बताया हीं नहीं।"

           "आपको नहीं बताया, बट बचपन से हीं मैं आर्मी ज्वाइन करना चाहता हूँ ।"

           "ठीक हैं, मैं मान लेती हूँ कि तुम्हारी बचपन से हीं आर्मी ज्वाइन करने की तमन्ना हैं, लेकिन अब तुम भी ये मान लो कि तुम्हारी ये तमन्ना कभी पूरी नहीं होगी।"

          "क्यों, क्या मैं आपको आर्मी ज्वाइन करने के लिए फिजिकली या मेंटली अनफिट लगता हूँ।"

          "नो बेटा, मुझे तुम्हारी फिटनेस पर कोई डाऊट नहीं हैं।"

          "तो फिर आपने ऐसा क्यों कहा कि मेरी आर्मी ज्वाइन करने की तमन्ना कभी पूरी नहीं होगी ?"

          "क्योंकि मैं तुम्हें आर्मी ज्वाइन करने की परमिशन किसी कीमत पर नहीं दूँगी।"

           "क्यों ?"

           "क्योंकि आर्मी ज्वाइन करने का मतलब हैं, अपनी जान जोखिम में डालना और तुम जानते हो कि मैं तुम्हें ऐसा कोई काम करने की परमिशन किसी कीमत पर नहीं दे सकती, जिसमें तुम्हारी लाइफ को कोई भी नुकसान पहुँचने की आशंका हो।"

           "बुआ, आपकी इस बात ने मुझे काफी हर्ट किया, क्योंकि मैं ऐसा कभी सोच भी नहीं सकता था कि आप इतनी सेल्फिस होगी। आप सोचिए कि इस तरह हर कोई अपने फेमिली मेम्बर्स को ये सोचकर आर्मी ज्वाइन करने नहीं देगा कि इसमें जान का जोखिम हैं तो हमारी कन्ट्री की हिफाजत कैसे होगी ?"

            "बेटा, तुम ये लेक्चर मुझे तो न हीं दो तो अच्छा होगा, क्योंकि मैं एक शहीद फौजी की विडो हूँ। मैंने अपनी मैरिज से लेकर अपने पति के दुनिया छोड़ते तक उन्हें यही सोचकर एक बार भी आर्मी छोड़ने के लिए नहीं कहा कि इसी तरह हर महिला अपने स्वार्थ या अपनी खुशी के लिए अपने पति को आर्मी छोड़ने लगा देगी तो कन्ट्री की हिफाजत कौन करेगा। चूँकि मैंने अपने पति को उनके लाइफ टाइम तक आर्मी की सर्विस करने से नहीं रोका, इसलिए मेरे पास तुम्हें आर्मी ज्वाइन करने से रोकने का राइट रिजर्व हैं, क्योंकि हर फेमिली अपनी दो पीढ़ियों में से केवल अपने एक फेमिली मेम्बर को कन्ट्री की हिफाजत के लिए आर्मी को समर्पित कर दे तो भी देश की सुरक्षा को कभी कोई आँच नहीं आएगी।"

          "आपका कहना बिल्कुल सही हैं, बट मामा तो मेरे फेमिली मेम्बर नहीं थे और ......।"

          "हाँ, पर वे मेरी फेमिली की मेम्बर थे और तुम भी मेरी फेमिली के मेम्बर हो, इसलिए वे और तुम एज द मेम्बर्स आॅफ वन फेमिली काउंट किए जाएँगे। हाँ, मेरा तुम्हारे साथ ब्लड रिलेशन न होने की वजह से तुम खुद को मेरी फेमिली का मेम्बर नहीं मानते हो तो .....।"

          "बुआ, ये कैसी बात कर रही हैं आप ? मैं पलभर के लिए अपनी उस फेमिली का मेम्बर होने से इनकार कर सकता हूँ जिसमें मेरा जन्म हुआ, लेकिन आपकी फेमिली का मेम्बर होने से इनकार करने की तो मैं इमेजिनेशन भी नहीं कर सकता हूँ। आपको मैं भले हीं बुआ कहता हूँ बट इन फेक्ट आप मेरी लिए ठीक वैसी हीं माँ हैं, जैसी भगवान कृष्ण के लिए यशोदा मैया उनकी माँ थी।"

          "थैंक्स, बट यशोदा मैया ने जैसे भगवान कृष्ण को उन्हें छोड़कर जाने की परमिशन दे दीं थीं, वैसी परमिशन मैं तुम्हें कभी नहीं दूँगी, इसलिए अच्छे बच्चे की तरह मेरी बात मान लो और अपनी स्टडी पर काॅन्संस्ट्रेट करों, ओके ?"

         "नो बुआ, आपको मुझे आर्मी ज्वाइन करने की परमिशन देनी हीं पड़ेगी।"

          "मम्मा, आप भैया को आर्मी ज्वाइन करने की परमिशन मत देना।" दस-ग्यारह साल की आयु की रिंकी ने अंदरवाले कमरे से निकलकर उन दोनों के करीब आते हुए कहा।

          "बेटा, तुम सोई नहीं अभी तक ?" निहारिका ने उसकी ओर ममताभरी निगाहों से देखते हुए सवाल किया।

         "आप जानती हैं कि भैया से कहानी सुने बिना मुझे नींद नहीं आती और आज भैया ने मुझे कहानी नहीं सुनाई तो मुझे नींद कैसे आ सकती हैं ?"

         "बेटा, तुमसे कह चुकी हूँ कि आज भैया काफी परेशान हैं, इसलिए आज तुम बिना कहानी सुने हीं सोने की कोशिश करों, लेकिन तुम्हारा चेहरा देखकर लगता हैं कि तुमने सोने की कोशिश ही नहीं की।"

         "मम्मा, जब मुझे पता हैं कि मुझे भैया से कहानी सुने बिना नींद नहीं आएँगी तो मैं ट्राई करके अपनी एनर्जी वेस्ट क्यूँ करूँ ?"

         "बेटा, अब तुम धीरे-धीरे बड़ी हो रही हो, इसलिए भैया से कहानी सुनते-सुनते सोने की अपनी हैबिट चेंज करने की कोशिश करों। मान लो, भैया ने दो-तीन साल बाद शादी कर लीं और इसकी वाइफ भी कहानी सुनते-सुनते सोने की हैबिट वाली निकल गई तो ये तुम्हें कहानी सुनाकर सुलाने आएगा या उसे कहानी सुनाकर सुलाएगा ?"

         "मैं भैया को ऐसी लड़की से शादी करने ही नहीं दूँगी, जिसे कहानी सुनते-सुनते सोने की हैबिट हो, क्योंकि भैया से कहानी सुनने का राइट सिर्फ मेरा हैं। एम आई राइट भैया ?"

         "डेफिनेटली, दिस इज योर रिजर्व राइट। अब तुम वापस अपने कमरे में जाओं, मैं पाँच मिनट बाद आकर तुम्हें कहानी सुनाऊँगा।" हर्षित ने रिंकी की बात का जवाब देते हुए कहा।

            "प्राॅमिश ?"

            "प्राॅमिश।"

            "आपको मुझसे एक और प्राॅमिश करना होगा।"

            "बोलो, और कौन-सा प्राॅमिश करना हैं मुझे ?"

             "आप आर्मी ज्वाइन नहीं करेंगे।"

             "रिंकी,  तुम मुझे आर्मी ज्वाइन करने से सिर्फ इसलिए रोकना चाहती हो न कि मैं आर्मी ज्वाइन कर लूँगा तो मैं तुम्हें सुलाने के लिए कहानी नहीं सुना पाऊँगा ?"

            "नहीं भैया, इसका रिजन ये नहीं हैं। कहानी तो मैं आपके आर्मी ज्वाइन करने पर भी आपसे वीडियो काॅलिंग करके सुन सकती हूँ। एक्चुअली, मैं अपने पापा की तरह आपको खोना नहीं चाहती हूँ इसलिए ......।"

            "रिंकी, प्लीज रोना नहीं, अदरवाइज मेरा तुम्हारी आँखों में कभी आँसू न आने देने का वो प्राॅमिश टूट जाएगा जो मैंने पहली बार तुमसे राखी बँधवाने पर तुमसे किया था।" कहने के साथ हीं हर्षित ने रिंकी को अपनी ओर खींचकर गोद में बिठा लिया।

             "तो फिर जल्दी से ...।"

             "आई प्राॅमिश टू यू कि मैं आर्मी ज्वाइन नहीं करूँगा। अब जल्दी से मुस्कुरा दो।" हर्षित की बात सुनते हीं रिंकी के मासूम चेहरे पर प्यारी-सी मुस्कुराहट उभर आयी। जिसे देखने के बाद हर्षित का चेहरा खिल उठा, जबकि निहारिका की आँखों में संवेदनशील भावनाओं की अधिकता की वजह से आँसू आ गए।

                                         ..............

            "हम लोग सोने चले या कुछ और सुनना हैं ?" निहारिका, हर्षित और रिंकी जिस कमरे में बातें कर रहे थे, उसके बगलवाले कमरे में दोनों कमरों के बीच मौजूद बंद गेट के पास चेयर लगाकर बैठी रागिनी ने अपने सामने खड़ी निक्की और मानसी से धीमे स्वर में पूछा।

           "दी, मेरे दिमाग से तो इन लोगों की इतनी बातें सुनकर डाऊट पूरी तरह से निकल गया, लेकिन मुझे इन लोगों की बातचीत बहुत प्यारी लग रहीं हैं, इसलिए मैं इन लोगों की बातें एंड तक सुनूँगी। आपको नींद आ रही होंगी तो आप जाकर सो जाइए।" मानसी ने रागिनी की बात का जवाब दिया।

           "ओके, मैं अंदर जाकर सो रही हूँ। तुम लोगों का जब मन हो, आकर सो जाना।"

           "निक्की, तुम्हें नींद आ रही होंगी तो तुम भी जाकर सो जाओ।" रागिनी के अंदरवाले कमरे में जाने के बाद मानसी ने निक्की से कहा।

           "क्या हुआ ?" कोई जवाब नहीं मिलने पर मानसी ने गौर से निक्की का चेहरा देखते हुए पूछा।

           "कुछ नहीं।"

           "अरे, तुम तो रो रहीं हो।"

           "रोना तो आएगा ही यार, क्योंकि मैंने कारनामा हीं ऐसा किया हैं कि उसके लिए जिंदगी भर रोना और पछताना पड़ेगा।"

           "डोंट वरी, सब ठीक हो जाएगा। आई होप कि हम लोग हर्षित से मिलकर माफी माँगेंगे तो वो तुम्हें जरूर माफ कर देगा।"

           "हो सकता हैं कि वो मुझे माफ कर दे, बट मुझे लगता हैं कि मैंने जो थर्ड क्लास एलिगेशन उस पर लगाया हैं, उसकी वजह से मैं उससे कभी नजर मिला पाऊँगी। ये तो अच्छा हुआ कि उसने निहारिका मैम को इसके बारे में नहीं बताया, अदरवाइज वे मेरे बारे ......।"

           "निक्की, एक मिनट रूको। मुझे लगता हैं कि हमें इमिजेटली हर्षित को काॅल करके उससे रिक्वेस्ट करनी चाहिए कि वो निहारिका आंटी को इस एलिगेशन के बारे में कुछ न बताएँ, क्योंकि हो सकता हैं कि वो रिंकी को सुलाने के बाद अभी या कल सुबह उन्हें इसके बारे में बता दे।"

           "हाँ, लेकिन उसे काॅल मत करों, क्योंकि काॅल करके इस बारे में उससे बात करने पर मैम को पता चल सकता हैं। तुम एक काम करों, उससे इंस्टा या व्हाट्स-एप पर काॅन्टेक्ट करों।"

            "ठीक हैं, मैं उसे इन्स्टा पर मैसज करती हूँ।" कहकर मानसी ने एक चेयर पर पड़ा अपना मोबाइल उठा लिया।

                                        ............

             "तुम्हारी गुड़िया रानी सो गई ?" हर्षित अंदरवाले कमरे से निकलकर ड्राइंगरूम में आया तो निहारिका ने टीवी स्क्रीन से नजर हटाकर उससे पूछा।

            "जी बुआ।" हर्षित ने जवाब दिया।

            "तुम भी कभी-कभी परेशान हो जाते होंगे न, ये बिना सैलरी की ड्यूटी करते-करते ?"

             "नहीं बुआ, ये ड्यूटी करते हुए मैं कभी परेशान नहीं होता हूँ बल्कि मैं तो ये ड्यूटी करते हुए ये सोचकर संतुष्ट होता हूँ कि आपने और मामा ने करीब तेरह साल पहले मेरी और मेरी मम्मा की जान बचाकर हम लोगों पर जो अहसान किया था, उसके बदले में आप लोगों की इकलौती बेटी के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान लाने का मौका देकर आप मुझ पर एक और अहसान कर रही हैं।"

           "देखो हर्षित, यदि तुम ये ड्यूटी तुम पर और तुम्हारी मम्मा पर मेरे और रिंकी के पापा के किए गए किसी अहसान का बदला चुकाने के लिए कर रहे हो तो तुम्हें कल से आने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि मुझे ऐसा कोई अहसान याद नहीं हैं। मैं तो ये सोचकर तुम्हें ये ड्यूटी करने दे रही थीं कि तुम मेरी बेटी को अपनी छोटी बहन मानने की वजह से ये अपना फर्ज समझकर रहें हो, पर तुम तो ......।"

            "साॅरी बुआ, अब कभी मुझसे ऐसी गलती नहीं होंगी।"

             "इट्स ओके, बैठो।"

             "नहीं बुआ, रात के दस बज चुके हैं इसलिए मुझे अब घर जाना चाहिए।"

            "ठीक हैं जाओ, लेकिन जाने से पहले ये बता दो कि कहीं तुम उस लव ट्राइंगल में फँसे हुए होने की वजह से तो आर्मी ज्वाइन करके यहाँ से खिसकना नहीं चाहते थे न, जिसके बारे में तुमने मुझे दो दिन पहले बताया था ?"

             "नहीं।"

             "तो फिर और कौन-सी नई वजह आ गई ?"

             "साॅरी, मैं वो वजह आपको नहीं बता सकता।"

             "ठीक हैं, मत बताओ लेकिन ये तो बता दो कि तुम फिलहाल मानसी और निक्की को एक हीं कैम्पस में एक साथ कैसे हैंडल कर रहे हो ? एक्चुअली, तुमने बताया था न कि तुम अपने काॅलेज में स्टूडेंट यूनियन का इलेक्शन होते तक मानसी को महसूस नहीं होंने देना चाहते हो कि तुम्हारी लाइफ में अब निक्की आ चुकी हैं क्योंकि उसे ऐसा महसूस हो गया तो इलेक्शन में ठीक से कन्टेस्ट नहीं कर पाएगी और तुम उसे ये महसूस नहीं कराते हो तो वो तुमसे नजदीकियाँ बढ़ाने की कोशिश करेगी और इससे निक्की तुमसे रूठ जाएगी, मैं ये इसलिए पूछ रही हूँ।"

          "बुआ, आप इस बात लेकर टेंशन लेना बंद कर दीजिए क्योंकि मैं लव ट्राइंगल से भी बाहर निकल चुका हूँ और नाइंटी डिग्री के प्लेन एंगल से भी बाहर निकल चुका हूँ।"

          "मतलब ?"

          "मतलब ये हैं कि कल मानसी ने बिना बताए हीं वो सबकुछ रियलाइज कर लिया, जो मैं उसे इलेक्शन की प्रोसीजर कम्प्लिट होते तक नहीं बताना चाहता था और उसने कल हीं मुझे गुड बाय भी कह दिया था। उसके बाद आज निक्की ने भी गुड बाय कह दिया।"

          "मानसी के तुम्हें गुड बाय कहने की वजह मुझे समझ आ गई लेकिन निक्की ने तुम्हें क्यूँ गुड बाय कहा, ये मेरी समझ में नहीं आ रहा हैं ?"

          "आपको समझकर क्या करना हैं ?"

          "कुछ नहीं। मेरे लिए इतना हीं जानना काफी हैं कि तुम टेंशन भरी सिच्युएशन से बाहर निकल गए हो। तुम्हारी लाइफ में कौन आयी थीं, कौन चली गई और कौन आनेवाली हैं, इन बातों में मुझे कोई इन्ट्रेस्ट नहीं हैं। बस तुम मेरी एडवाइज हमेशा याद रखना कि किसी को खुश करने या किसी को मानसिक तनाव झेलने से बचाने के लिए खुद को फिर कभी इस टाइप की सिच्युएशन में मत फँसाना और हो सके तो अफेयर जैसी नाॅनसेंस चीजों से दूर रहना, क्योंकि इस टाइप की चीजें तुम्हें बिल्कुल भी सूट नहीं करतीं। तुम्हारे लिए अच्छा यही हैं कि तुम अपनी पढ़ाई पर काॅन्संस्ट्रेट करों और फिर अपनी सारी एनर्जी करियर बनाने में लगा दो। उसके बाद अपने जैसी एक सौम्य, खूबसूरत और समझदार लड़की देखकर शादी कर लेना।"

           "एडवाइज के लिए थैंक्स बुआ। मैं खुद भी ऐसा हीं कुछ सोच रहा था। अफेयर को लेकर मेरा अब तक का एक्सपीरियंस इतना खराब रहा हैं कि मैं अब कभी दुबारा किसी से दिल लगाने की बात सोच भी नहीं सकता। अब मुझे घर जाने की परमिशन दीजिए, गुड नाइट।"

          "गुड नाइट माइ स्वीट चाइल्ड।" निहारिका के मुँह से जवाब सुनने के बाद हर्षित घर से बाहर निकल गया।

                            ...............

           "मैंने काॅलेज का चप्पा-चप्पा छान मारा, लेकिन हर्षित कहीं भी नजर नहीं आया।" काॅलेज-कैम्पस में खड़ी निक्की और मानसी के पास आकर चेतन ने जानकारी दी तो उन दोनों के चेहरे पर छाए परेशानी के बादल और गहरा गए।"

            "कहाँ चला गया यार ये ? कैसे पता लगाए कि ये जनाब हैं कहाँ ? उसने मोबाइल भी स्वीच्ड ऑफ कर रखा हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि .......।"

            "मानसी, वो जरूर अपने क्लब की टीम के लिए मैच खेलने गया होगा। तुम्हें याद हैं, वो निहारिका मैम से कल ....।" मानसी ने आँखों के इशारे से निक्की को चेतन की उपस्थिति का अहसास दिलाया तो निक्की ने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया।

            "तुझे आगे कुछ कहने की जरूरत नहीं हैं, मैं इतने क्लू से समझ गई कि वो कहाँ होगा।" मानसी ने तुरंत मोर्चा सम्भाल कर उससे कहा और फिर चेतन से बोली-  "तुम्हारे पास हर्षित के दोस्त पंकज का काॅन्टेक्ट नम्बर हैं ?"

             "नहीं।"

             "तो ऐसा करों, अभी के अभी अपने किसी सोर्स से ये पता करके हम लोगों को बताओं कि एनएसबी क्लब की क्रिकेट टीम का मैच आज कितने बजे से किस ग्राउंड पर हैं ?"

             "सरदार पटेल स्टेडियम में साढ़े-बारह बजे से स्टार्ट हो चुका हैं।" चेतन ने एक-डेढ़ मिनट किसी फोन पर बात करने के बाद मानसी को बताया।

            "और खत्म कितने बजे होगा ?"

            "ये नहीं पूछा, बट आई एम श्योर कि साढ़े तीन बजे तक खत्म हो जाएगा, क्योंकि क्लब लेबल के ज्यादातर मैचेस ट्वेंटी-ट्वेंटी ओवर्स के होते हैं और लगभग तीन घंटे में खत्म हो जाते हैं।"

            "थैंक्स फाॅर इन्फार्मेशन। हम लोग हर्षित से मिलने स्टेडियम जा रहे हैं। यदि उसकी टीम आज का मैच जीत जाएगी तो वो जीत के साथ-साथ हमारे उसकी टीम को सपोर्ट करने जाने की खुशी में हम लोगों को जल्दी से माफ कर देगा। हमारे उसे साथ लेकर वापस लौटते तक तुम हमारे ग्रुप के अदर मेम्बर्स के साथ जाकर थोड़े हाथ-पैर चलाओ।"

            "ओके।"

            "चले ?" चेतन के कुछ कदम दूर जाने के बाद मानसी ने निक्की से पूछा।

            "यार, मैं सोच रही हूँ कि तुम अकेली हीं चली जाती तो बेटर होता, क्योंकि मैं साथ रहूँगी तो......?"

            "डोंट वॅरी, कुछ नहीं होगा।"

            "अरे, लेकिन ......।"

            "अब मैं तुम्हारा कोई लेकिन-वेकिन नहीं सुनूँगी। तुम सीधी तरह मेरे साथ आ जाओं, अदरवाइज मुझे तुम्हें घसीटते हुए ले जाकर अपनी कार में बिठाना पड़ेगा। तुम आ रही हो या ......?"

            "ये लड़की वाकई पागल हो गई हैं।"

            "पता चल गया न कि मैं पागल हो गई हूँ तो अब पैर आगे बढा लो, अदरवाइज मैं तुम्हारे साथ वही सब करूँगी जो एक पागल इंसान अपनी बात न मानने वाले के साथ करता हैं।"

              "चलो।" कहकर निक्की ने पाॅर्किंग की ओर अपने कदम बढ़ा दिए।
                                 .............

            "यार, तुम्हारी गेसिंग तो एकदम परफेक्ट निकली। लोगों का जोश और उत्साह देखकर लगता हैं कि अभी काफी मैच बचा हुआ हैं।" सरदार पटेल स्टेडियम में दर्शकों के बीच खड़ी निक्की ने बगल में खड़ी मानसी से उत्साहित स्वर में कहा।

            "बट तुम्हारी गेसिंग पूरी तरह से इनकरेक्ट हैं।" जवाब में मानसी नर्वस स्वर में बोली।

            "यू मीन टू से कि मैच खत्म हो चुका हैं ?"

            "मैच में तो अभी दस बाॅल डाली जानी बाकी हैं, बट इसका रिजल्ट तय हो चुका हैं।

            "हर्षित की टीम जीत रही हैं या हार रही हैं ?"

             "हार रही हैं।"

             "मजाक कर रहीं हो न तुम ?"

             "काश ! मैं ऐसा कह पाती कि मैं .....।"

             "एक मिनट, कमेंटेटर मैच के बारे में कुछ बता रहा हैं, .............तुमने सुना, वो कह रहा था कि एनएसबी क्लब के कैप्टन हर्षित ऐसी सिच्युएशन में भी कई बार अपनी टीम को मैच जीता चुके हैं ?"

             "हाँ, लेकिन उसने इससे आगे जो कहा, वो तुमने नहीं सुना। उसने इससे आगे ये कहा कि लेकिन इस बार वे भी अपनी टीम को नहीं जीता पाएँगे क्योंकि उन्हें उनके साथी खिलाड़ियों का कोई भी सहयोग नहीं मिल पा रहा हैं।"

            "अरे, लेकिन उसके साथी खिलाड़ी उन्हें सहयोग नहीं कर रहें हैं तो वे खुद बैटिंग क्यूँ नहीं कर रहा हैं ? क्यूँ दूसरी तरफ खड़े होकर अपने साथियों के आऊट होने का तमाशा देख रहा हैं ?"

            "बहन, ये क्रिकेट मैच हैं। हम लोगों के बैडमिंटन के डबल्स का मैच नहीं हैं कि एक प्लेयर ठीक से सर्विस नहीं कर पा रहा हैं तो दूसरा प्लेयर सर्विस की रिस्पांस्ब्लिटी अपने सोल्डर पर ले सकता हैं। इसमें नाॅन स्ट्राइक एंड पर खड़ा बैट्समेन तभी बैटिंग कर सकता हैं, जब उसे सामने वाला बैट्समेन स्ट्राइक दे या ओवर चेंज होने पर उसे स्ट्राइक मिले।"

            "तो क्या हर्षित को स्ट्राइक कभी नहीं मिलेगी ?"

            "शायद अब तो ओवर चेंज होने पर हीं मिलेगी क्योंकि उसके सामने खेलने वाले प्लेयर्स तो अपना विकेट तक नहीं बचा पा रहे हैं, रन लेकर स्ट्राइक कहाँ से देंगे ?"

            "ओवर चेंज होने के बाद ये कुछ नहीं कर पाएगा क्या ?"

             "नहीं, क्योंकि तब तक मैच पूरी तरह से हाथ से निकल जाएगा।"

             "तो ये सामने वाले प्लेयर को उसे स्ट्राइक देने के लिए मोटिवैट क्यूँ नहीं कर रहा हैं ?"

             "शायद उसको हम दोनों की वजह से पिछले तीन-चार दिनों से जो मानसिक तनाव झेलना पड़ा हैं, उसकी वजह से वो आज मेंटली एंड फिजिकली मैच पर इतना काॅन्संस्ट्रेट नहीं कर रहा हैं, जितना वो नाॅर्मल कंडीशन में करता हैं।"

             "ऐसा हैं तो हम लोगों को ग्राउंड में चलकर उसे ये बताना चाहिए कि हम लोगों को अपनी गलती का अहसास हो गया, ताकि उनका खोया हुआ काॅन्फिडेंस वापस आ सके।"

              "आई एग्री विद यू बट हम लोग ग्राउंड में नहीं जा सकते क्योंकि रनिंग मैच में सिर्फ टीम मेम्बर्स और सपोर्टिंग स्टाॅफ हीं ग्राउंड में जा सकते हैं।"

              "इतना तो मैं भी जानती हूँ लेकिन हमें कैसे भी करके जाना हीं होगा। एक काम करते हैं, हम लोग अम्पायर से ये कहकर उनसे बात करने की परमिशन ले लेंगे कि हम लोग हर्षित के फ्रेंड्स हैं और हमारे पास उसकी मम्मा ने काॅल करके उन्हें एक मैसेज देने के लिए कहा हैं।"

              "ठीक हैं, चलों जल्दी से। अभी-अभी एक और विकेट गिरा, इस वजह से मैच रूका हैं। हमें नए बैट्समेन के क्रीज पर पहुँचने से पहले हर्षित के पास पहुँचना होगा।" कहने के साथ हीं मानसी दर्शक दीर्घा से बाहर निकलने का प्रयास करने लगी। निक्की ने भी अविलंब उसका अनुसरण करना शुरू कर दिया।

              स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था। स्टेडियम में मौजूद ज्यादातर दर्शकों के चेहरे मुरझाए हुए थे जबकि काफी कम दर्शक खुशी और उत्साह से झूम रहे थे, पर सबकी निगाहें ग्राउंड के उस हिस्से पर टिकी हुई थीं, जहाँ निक्की और मानसी मैच के दोनों अम्पायर्स से बात कर रही थीं। उन चारों के आसपास कुछ प्लेयर्स भी इकट्ठा हो चुके थे।

              "देखिए, आप लोग बात को समझने की कोशिश कीजिए। हम इस टूर्नामेंट के रूल्स के एकार्डिंग आप लोगों को इस वक्त मिस्टर हर्षित से बात करने की परमिशन नहीं दे सकते हैं। आप लोगों को उन्हें जो भी मैसेज देना हैं, मैच के बाद दे दीजिएगा। अब आप लोग जाइए।" एक अम्पायर ने निक्की और मानसी को समझाने का प्रयास किया।

             "अरे, ये क्या कर रहे हैं आप ? ये लोग अपने फ्रेंड से बात करना चाहती हैं तो कर लेने दीजिए, अदरवाइज ये दोनों आप लोगों को हमेशा इस बात के लिए कोसती रहेगी कि आप लोगों ने इन्हें इनके फ्रेंड से मिलने नहीं दिया, इसलिए इनके फ्रेंड अपनी टीम को मैच नहीं जीता पाए।" निक्की और मानसी के अम्पायर को दुबारा कुछ कहने से पहले पास खड़ा एक ऊँचे कद का हट्टा-कट्टा प्लेयर मुस्कुराकर बोल पड़ा।

            "आप लोग बाद में कोई ऑब्जेक्शन तो नहीं लेंगे ?"

            "ये दस मिनट पहले मिलना चाहती तो हम लोग जरूर ऑब्जेक्शन लेते, लेकिन इस वक्त हमारे ऑब्जेक्शन लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता हैं क्योंकि ये लोग हमारी अपोजिट टीम के कैप्टन को अच्छा खेलने के लिए मोटिवैट करने से मैच के रिजल्ट पर कोई असर नहीं पड़ने वाला हैं।"

              "आप लोगों को कोई ऑब्जेक्शन नहीं हैं तो हमें भी कोई दिक्कत नहीं हैं, लेकिन ये बात आपको हमें लिखकर देनी होगी।"

              "ठीक हैं, मैं लिखकर दे रहा हूँ। तब तक आप इन्हें इनके फ्रेंड से मिल लेने दीजिए।"

              "जाइए, आप लोग मिस्टर हर्षित से जल्दी से मिलकर मैदान से बाहर निकल जाइए।" अम्पायर के मुँह से इतना सुनते हीं निक्की उसे 'थैंक्स' बोलकर मानसी के साथ ग्राउंड के उस भाग की ओर बढ़ गई, जहाँ हर्षित अपने नवागंतुक साथी बैट्समेन के साथ खड़ा उनकी ओर देख रहा था।
                              ..................

         "तुम लोग यहाँ किसलिए आए हो ?" निक्की और मानसी को आग्नेय नेत्रों से घूरते हुए हर्षित ने पूछा।

        "तुम्हें सपोर्ट करने।" मानसी ने झिझकते हुए जवाब दिया।

         "तो स्टेडियम में बैठकर सपोर्ट करना चाहिए था न, यहाँ ग्राउंड में आकर अपना और मेरा मजाक बनाने की क्या जरूरत थीं ?"

          "यार हर्षित, हम लोग अम्पायर्स से लड़-झगड़कर आपको मैच जीतने के लिए टिप्स देने आए हैं और तुम हो कि हम लोगों का अहसान मानने की जगह हमें डाँट रहे हो।" इस बार जवाब देते समय मानसी के लहजे से झिझक नदारद हो चुकी थीं।

         "तुम दोनों में से किसी ने कभी क्रिकेट का बैट पकड़कर देखा हैं ?"

          "नहीं, लेकिन हम दोनों शटल क्वीन हैं।"

          "मैडम, बैडमिंटन और क्रिकेट में अंतर होता हैं।"

          "हाँ, बट दोनों के मैचेस जीतने के लिए पैशन और सेल्फ-काॅन्फिडेंस का होना जरूरी हैं जो इस वक्त तुम्हारी बाॅडी लैंग्वेज और फेस एक्सप्रेशंस में कहीं भी नजर नहीं आ रहा हैं। हम उसे हीं जगाने आए हैं।

         "इससे कोई फायदा नहीं होनेवाला हैं क्योंकि हमारे लिए ये मैच जीतना इम्पाॅसिबल हो चुका हैं।"

         "हर्षित, तुम ऐसा कैसे कह सकते हो ? तुम तो हमेशा कहते थे न कि इस दुनिया में कोई भी काम इम्पाॅसिबल नहीं होता हैं।"

         "हाँ, लेकिन हर वक्त हर काम पाॅसिबल भी नहीं होता हैं, जैसे अब इस मैच को जीतना हमारे लिए पाॅसिबल नहीं हैं क्योंकि हमें इसे जीतने के लिए हमें सात बाॅल में सैतीस रनों की जरूरत हैं और स्ट्राइक पर पंकज हैं जो हमारी टीम में एज द बाॅलर खेलता हैं और उसके सामने जो बाॅलर बाॅलिंग कर रहा हैं, उसकी पिछली पाँच बाॅल पर हमारी टीम के तीन रैकेटनाइस बैट्समैन सिंगल तक नहीं ले पाए, इसलिए एक बाॅलर से उसकी बाॅल पर चौके-छक्के या दो रन लेने की उम्मीद करना बेकार हैं। ये अपना बेस्ट अटैम्प भी करेगा तो उसकी लास्ट बाॅल पर ज्यादा से ज्यादा सिंगल ले पाएगा, पर इससे अगले ओवर में ये स्ट्राइक पर पहुँच जाएगा और ये उस लास्ट ओवर की सिक्स बाॅल पर लगातार सिक्स सिक्सर लगाकर थर्टी सिक्स रन बना लेगा, ये सोचना भी बेकार हैं और इसे सेकंड लास्ट ओवर की लास्ट बाॅल पर सिंगल लेने से मना करता हूँ तो भी ये मैच जीतना इम्पाॅसिबल हो जाएगा, क्योंकि फिर मेरे सामने सिक्स बाॅल में थर्टी सेवन रन बनाने की चुनौती होगी जो इम्पाॅसिबल हैं। अब तुम बताओ कि इस सिच्युएशन में पैशन और सेल्फ-काॅन्फिडेंस जगाने से क्या हो जाएगा ?"

           "बहुत कुछ हो सकता हैं। तुम अपने पार्टनर से कहो कि लास्ट बाॅल पर चौका-छक्का या टू रन लेने की कोशिश करें और ये ऐसा नहीं कर पाता हैं तो तुम अगले ओवर में सिक्स बाॅल पर सिक्स लगाकर मैच को टाई करा लो, उसके बाद टाई ब्रेकर से मैच जीतने की कोशिश करों।"

            "इस टूर्नामेंट में मैच टाई होने पर टाई ब्रेकर से मैच की हार-जीत तय करने का रूल नहीं हैं।"

            "तो टाई होने पर विजेता कैसे तय किया जाएगा ?"

            "मैच में जिस टीम का नेट रन रेट बेहतर होगा, उसे विनर डिक्लियर कर दिया जाएगा।"

           "और इस मैच में नेट रन रेट किसका बेहतर हैं ?"

            "हमारी अपोजिट टीम का। उन्होंने उन्नीस ओवर और तीन बाॅल खेलकर आल आऊट होने से पहले एक सौ नब्बे रन बनाए थे, जबकि हम लोगों इतने ही रन बनाने के लिए पूरे बीस ओवर खेलना पड़ेगा।"

           "तो तुम एक काम करों, लास्ट ओवर की शुरुआत की दो या तीन बाॅल पर लम्बे-लम्बे छक्के लगाकर बाॅलर को चिढ़ाओं। इससे हो सकता हैं कि बाॅलर अपना पेशंस खोकर कोई वाइड या नो बाॅल कर दे और तुम सैतीस रन बनाकर मैच जीतने में कामयाब हो जाओ।"

           "मानसी, बच्चों जैसी बात मत करों यार। हो सकता हैं कि तुम्हारी बताई ट्रिक से बाॅलर कोई नो या वाइड बाॅल करके एकाध एडिशनल रन दे दे, बट फिर भी लगातार सिक्स बाॅल पर सिक्स सिक्सर्स लगाना इम्पाॅसिबल हैं।"

           "बिल्कुल इम्पाॅसिबल नहीं हैं, क्योंकि अलग-अलग लेबल के कई मैचेस बहुत से बैट्समैन ऐसा कारनामा कर चुके हैं और तुमने भी तो एक बार हमारे काॅलेज की ओर से खेलते हुए आईजी काॅलेज की टीम के खिलाफ लगातार सिक्स बाॅल पर सिक्स सिक्सर्स लगाए थे, फिर तुम क्यों कह रहे हैं कि ये काम इम्पाॅसिबल हैं ?"

          "इसलिए, क्योंकि इसका फर्स्ट रिजन ये हैं कि आईजी काॅलेज की टीम और कन्ट्री की क्लब लेबल की वन आॅफ द बेस्ट क्रिकेट टीम माने जानेवाली इस टीम में काफी अंतर हैं और सेकंड रिजन ये हैं कि किसी भी लेबल के मैचेस लगातार सिक्स बाॅल पर सिक्स सिक्सर लगाना हर वक्त पाॅसिबल नहीं हैं। खासतौर पर तब, जब ये करना जरूरी हो। लास्ट ओवर में टारगेट चेस करते समय ऐसा कारनामा किसी भी लेबल के किसी भी मैच में आज तक नहीं हुआ।"

          "लेकिन तुम्हें आज ये कारनामा करके दिखाना पड़ेगा, क्योंकि ऐसा नहीं करेंगे तो काफी लोगों का दिल टूट जाएगा। देखो, स्टेडियम में मौजूद लोगों के चेहरे अपनी लोकल टीम को हारते देखकर कैसे मुरझा गए हैं। क्या तुम नहीं चाहोगे कि ये सब लोग ........?"

           "सुनिए, अब आप लोग जाइए, क्योंकि हमारे लिए अब आप लोगों को बातचीत के लिए और टाइम देना पाॅसिबल नहीं हैं।" मानसी की ये बात पूरी होने से पहले ही एक अम्पायर ने उन लोगों के करीब आकर कहा तो मानसी अपनी बात ये अधूरी छोड़नी पड़ी और वो हर्षित को 'बेस्ट ऑफ लक' बोलकर निक्की के साथ ग्राउंड से बाहर निकल गई।

             मैच दुबारा शुरू हुआ। हर्षित के न्यू पार्टनर बैट्समैन पंकज ने पारी की उन्नीसवे ओवर की आखिरी बाॅल पर काफी जोरदार ढंग से बल्ला चलाया, लेकिन बाॅल चालीस गज के दायरे में मिड ऑन पर खड़े फिल्डर ने अपनी फुर्ती दिखाकर रोक लीं, इस वजह से एनएसबी की टीम को कोई भी रन नहीं मिल पाया। इसके बाद हर्षित ने पंकज के पास आकर कुछ समझाया।

          एक शाॅर्ट ब्रेक के बाद मैच का आखिरी ओवर शुरू हुआ तो स्ट्राइकर एंड पर हर्षित खड़ा था। बाॅलर ने अपनी पहली बाॅल ऑफ स्टम्प से हल्की-सी बाहर डाली, जिसे हर्षित ने थोड़ा-सा लेग स्टम्प की तरफ हटकर तिरछे बल्ले से से लांग ऑफ की तरफ उठाकर मारा, जिसके परिणामस्वरूप बाॅल लांग ऑफ के ऊपर से होती हुई स्टेडियम में बैठे दर्शकों के बीच पहुँच गई। इसके तुरंत बाद नाॅनस्ट्राइकर एंड पर खड़े अम्पायर ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर सिक्सर लगने का इशारा किया। ये देखकर काफी देर से खामोश बैठे दर्शक में हल्की-सी उत्साह की लहर देखने को मिलीं।

            "भाई, तूने और तेरे साथियों ने आज हमारे बैट्समैन को जितना परेशान किया हैं, ये उसके बदले की पहली किस्त थीं। अभी तुझे ऐसी हीं पाँच किस्ते और चुकानी पड़ेगी।" बाॅल वापस ग्राउंड पर आने पर जैसे हीं बाॅलर अपने बाॅलिंग मार्क की ओर जाने लगा, वैसे ही नाॅनस्ट्राइकर एंड पर खड़े पंकज ने उससे धीरे से ये बात कहकर छेड़ दिया।

           "अच्छा !" अपनी बाॅल पर जबर्दस्त छक्का पड़ जाने की वजह से पहले से गुस्से से उबल रहे बाॅलर ने रूककर पंकज को घूरते हुए जवाब में कहा।

            "हाँ भाई,  हमारे कैप्टन की जिस किसी बाॅलर पर वक्र दृष्टि पड़ जाती हैं, वो उसकी बाॅलिंग की इतनी धज्जियाँ उड़ाता हैं कि अगले कई मैचेस में बाॅलिंग करते समय उस बाॅलर के हाथ-पैर काँपते हैं। लगता हैं, आज उसकी दृष्टि तुझ पर पड़ गई हैं, इसलिए आज तेरा भी बहुत बुरा हाल होनेवाला हैं। भाई, तू अपनी बेइज्जती बर्दाश्त करने के लिए तैयार हो जा, क्योंकि अब तेरी अगली बाॅल पर इससे भी लम्बा छक्का पड़ने वाला हैं।"

            "ये तो अगली बाॅल पर पता चलेगा कि छक्का पड़ेगा या कुछ और होगा, पर तेरी जानकारी के लिए बता देता हूँ कि जो राज की बात आज तक सिर्फ मेरे शहर के लोग जानते थे, वो आज तेरे शहर का हरेक शख्स जान जाएगा और वो राज की बात ये हैं कि जो कोई भी परेश की बाॅल पर छक्का मारता हैं, अगली बाॅल पर न उसके सिर के ऊपर का हेलमेट उसका जबड़ा टूटने से बचा पाता हैं और न ऊपरवाला। अब तक आठ लोग ऐसी गलती करके उसका खामियाजा भुगत चुके हैं, अगली बारी तेरे कैप्टन की हैं।" कहकर बाॅलर अपना तमतमाया चेहरा लिए अपने बाॅलिंग माॅर्क की ओर बढ़ गया।

           परेश ने दूसरी बाॅल पिच के लगभग मध्य भाग में काफी ताकत से पटकी, जो पिच होकर तेजी से हर्षित के कंधे तक उठी, लेकिन हर्षित बाॅल के पिच होते ही उस बाॅल को हैंडल करने के लिए पोजिशन ले चुका था। उसने बाॅल के अपने करीब आते ही थोड़ा-सा लेग स्टम्प की तरफ हटकर उस पर अपर कट खेल दिया, जिससे बाॅल हवा में उड़ती हुई थर्डमेन के फिल्डर के पीछे बाउंड्रीलाइन के बाहर गिरी। इस बार हर्षित के इस छक्के का दर्शकों ने काफी जोरदार ढंग से स्वागत किया।

          "क्यों भाई, तू इसी खामियाजे की बात कर रहा था क्या ?" पंकज ने तुरंत परेश के करीब आकर उस पर तंज कसा।

           "तू सिर्फ एक मिनट रूक, तुझे मेरे अगली बाॅल डालते ही पता चल जाएगा कि मैं किस खामियाजे की बात कर रहा था।" पंकज की बात का किसी जहरीले नाग की तरह फुँफकार कर जवाब देने के बाद परेश पैर पटकता हुआ अपने बाॅलिंग मार्क पर पहुँचा।

            अम्पायर का इशारा मिलते हीं उसने दौड़ते हुए बाॅलिंग क्रीज के करीब आकर बीच पिच पर इतनी जोर से बाॅल पटकी कि वो टप्पा खाने के बाद पहले हर्षित के सिर के ऊपर से और फिर विकेट कीपर के भी सिर के ऊपर से गुजरकर ग्राउंड पर गिरी और तेजी से लुड़कती हुई बाउंड्रीलाइन के बाहर पहुँच गई। अम्पायर ने पहले अपना एक हाथ कंधे की सीध में फैलाकर नो बाॅल का, फिर हाथ सीधा खड़ा करके बाई का और फिर हाथ हिलाकर चौके का इशारा किया, जिसका स्टेडियम में मौजूद एनएसबी के समर्थकों ने जबर्दस्त ढंग से स्वागत किया।

           इसके बाद पंकज दौड़कर हर्षित से गले मिल लिया, जबकि उनकी अपोजिट टीम के कैप्टन ने परेश के पास जाकर उसे जमकर लताड़ा।

           इस नो बाॅल पर बाई के रूप में एनएसबी की टीम को बाउंड्री मिलने के बाद कमेंटेटर्स के अंदर भी जबर्दस्त जोश का संचार हुआ। दर्शकों के शोर के बीच काफी धीमी आवाज कमेंट्री कर रहे कमेंटेटर की आवाज अचानक तेज हो गई। वह कह रहा था- "कुछ देर पहले तक एकतरफा लगनेवाले मैच में एकाएक रोमांचक मोड़ आ गया हैं। इस ओवर के स्टार्ट होने से पहले एनएसबी क्रिकेट क्लब की टीम को मैच जीतने के लिए छः बाॅल में सैतीस रनों की आवश्यकता थीं, जो एक इम्पाॅसिबल टार्गेट था, लेकिन इस टीम के कप्तान के लगातार दो बाॅल पर दो शानदार छक्के मारने और उसके बाद एमजी क्रिकेट क्लब की टीम के फास्ट बाॅलर द्वारा एक नो बाल पर बाई का चौका देकर एनएसबी को एक पाँच अतिरिक्त रन और एक एडिशनल बाॅल खेलने का मौका दे देने की वजह से अब एनएसबी को मैच जीतने के लिए चार बाॅल में बीस रनों की आवश्यकता रह गई हैं जो इस टीम के कप्तान के फाॅर्म और पिछला रिकॉर्ड को देखकर इम्पाॅसिबल लक्ष्य नहीं रह गया हैं, लेकिन ये लक्ष्य अभी भी काफी मुश्किल लग रहा हैं। अगले कुछ मिनटों में ये देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सी टीम इस मैच को जीतने में कामयाब होती हैं।"

           कुछ पलों के बाद ग्राउंड परेश ने अगली बाॅल डाली, जिसे हर्षित ने परेश के सिर के ऊपर से उछालकर बाउंड्रीलाइन के पार भेज दिया। इसके बाद परेश की लेग स्टम्प पर डाली गई बाॅल को हर्षित ने स्केवर लेग के ऊपर से बड़ी आसानी से दर्शकों के बीच पहुँचा दिया। 

          परेश की यार्कर डालने के प्रयास में फुलटाॅस की गई अगली बाॅल को हर्षित ने आड़े बैट से लांग ऑन बाउंड्री के बाहर भेजकर अपनी टीम को लक्ष्य के काफी करीब पहुँचा दिया। अब उसकी टीम को मैच जीतने के लिए एक बाॅल में सिर्फ दो रनों की जरूरत थीं।

          परेश ने अपने कप्तान के साथ कुछ देर सलाह-मशविरा करने के बाद मैच की आखिरी बाॅल डालने के लिए दौड़ना शुरू किया तो दर्शकों का शोर-गुल अचानक बंद हो गया। सभी लोग अपनी साँसें रोककर मैदान की ओर टकटकी लगाकर देख रहे थे, लेकिन जैसे ही परेश की बाॅल को हर्षित ने अपने बैट से एक बार फिर हवाई मार्ग से बाउंड्रीलाइन से बाहर पहुँचाया, वैसे हीं स्टेडियम में मौजूद एनएसबी के समर्थक खुशी से झूम उठे।

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          "प्लीज मानसी, निक्की ने कल मुझ पर जो एलीगेशन लगाया था, उसके बारे में कोई बात मत करों।" स्टेडियम के बाहर पार्किंग में खड़े हर्षित ने अपने सामने खड़ी मानसी से रिक्वेस्ट करने के अंदाज में अपनी बात कही।

         "ओके, नहीं करूँगी बट तुम्हें निक्की को माफ करना पड़ेगा।" मानसी ने उसकी बात पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा।

          "यार, उसने कोई गलती हीं नहीं कीं हैं तो मैं उसे माफ किस बात के लिए करूँ ? एक्चुअली, गलती तो मैंने की हैं उससे फ्रेंडशीप करके और उसका प्रपोजल एक्सेप्ट करके, इसलिए माफी मुझे उससे माँगनी चाहिए। क्या मेरी ओर से उससे माफी माँग सकती हो ?"

          "मैं समझ सकतीं हूँ हर्षित कि निक्की के कल तुम पर लगाए एलीगेशन के बाद तुम्हें उस पर कितना गुस्सा आ रहा होगा, क्योंकि तुम उसके साथ बचपन की काफी शाॅर्ट पीरियड की जिस फ्रेंडशीप की वजह से उसे तब तक मिस करते रहे, जब तक उसका तुम्हें दुबारा साथ नहीं मिल गया और तुमने उसका दिल न टूटे, इस वजह से तुमने मेरे और तुम्हारे बीच पैदा हुए डिस्टेंस को मिटाने की जगह उसका हाथ थाम लिया, लेकिन उसने किसी के बहकावे में आकर तुम्हें बिना सफाई का मौका दिए तुमसे रिश्ता तोड़ने में पलभर की भी देर नहीं कीं। मगर म, इसमें उसकी गलती कम और तुम्हारी उस कजिन की ज्यादा हैं, जिसने उसे ये फाल्स इन्फार्मेशन दी थीं, इसलिए प्लीज उसे माफ कर दो। तुम उसे माफ नहीं करोगे तो वो पता नहीं कितने दिनों तक इसी तरह गुमसुम और उदास रहेगी, जैसी आज काॅलेज आने के बाद से हैं। वो बेचारी कल रात भी तुम्हारे और निहारिका आंटी के रिश्ते की सच्चाई का अहसास होने के बाद से पूरी रात रोती रही। तुम उसका गौर से चेहरा देखोगे तो खुद जान जाओगे कि उस पर क्या बीत रही होगी। प्लीज, एक बार उसके पास जाकर कह दो कि तुमने उसे माफ कर दिया।"

          "कह दूँगा, लेकिन मेरी एक शर्त हैं कि मैं इन फ्यूचर उसके साथ कोई रिलेशन नहीं रखूँगा।"

           "ये तुम दोनों की आपसी कन्सेंट पर डिपेंड करता हैं कि तुम दोनों एक-दूसरे साथ कोई रिलेशन रखना चाहते हो या नहीं, इसलिए मैं इस मैटर पर कुछ नहीं कहूँगी। बट वो इतनी लवली गर्ल हैं कि उसके तुम्हारे दिल से मेरी जगह छीनने के बावजूद मेरे दिल में उसके लिए सिम्पैथी पैदा हो चुकी हैं, इसलिए मैं उसे उसकी मिस्टेक के लिए तुमसे माफी दिलाकर ही रहूँगी। इसके अलावा तुम्हें मेरी एक और रिक्वेस्ट माननी पड़ेगी। तुम्हें लाइफ टाइम के लिए मुझे अपनी बेस्ट फ्रेंड बनाना होगा। निक्की ने तुम्हारी लवर का टाइटल मुझसे छीना था, इसलिए मैं उससे तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड का टाइटल छीनकर हिसाब बराबर करना चाहती हूँ। क्या तुम मुझे लाइफ टाइम के लिए अपनी फ्रेंडशीप का टाइटल दोगे ?"

           "हाँ, लेकिन इस शर्त पर कि तुम मेरी और निक्की की काॅमन फ्रेंड होने का मिसयूज करके कभी भी हम दोनों को एक छतरी के नीचे लाने की कोशिश नहीं करोगी और तुम कभी भी निक्की और मेरे बीच खत्म हो चुके रिश्ते के बारे में डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चर्चा नहीं करोगी।"

          "मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर हैं, बट तुम्हें भी मेरी ये बात माननी पड़ेगी कि तुम कभी मुझे अपने और निक्की में से किसी एक की फ्रेंडशीप चुनने के लिए नहीं कहोगे, क्योंकि तुम ऐसा कहोगे तो मैं बहुत बड़े धर्मसंकट में फँस जाऊँगी। मैं तुम्हारी फ्रेंडशीप तो छोड़ हीं नहीं पाऊँगी, पर निक्की की फ्रेंडशीप छोड़ने का भी मुझे कम दुख नहीं होगा।"

            "मानसी, तुम्हारी तबीयत तो ठीक हैं न ?"

            "क्यों, मेरी तबीयत को क्या हुआ ?"

            "तुम आज काफी बहकी-बहकी बातें कर रही हो, इसलिए मुझे लगा कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं हैं।"

            "मजाक उड़ा रहे हो मेरा ?"

            "नो यार, मैं तो चंद दिनों में ही तुम्हारी पर्सनाल्टी में आया ये जबरदस्त बदलाव देखकर हैरानी जता रहा हूँ।"

            "मेरी पर्सनाल्टी में आए बदलाव से मैं खुद भी हैरान हूँ। तुम जानना चाहोगे कि तुम काफी कोशिशों के बावजूद मुझे जैसी नहीं बना पाए, वैसी मैं किस वजह से खुद-ब-खुद ही बन गईं ?"

             "हाँ।"

             "एक्चुअली परसो जब मुझे तुम्हें हमेशा के लिए खो देने का अहसास हुआ, तब मैंने अपने अंदर की उस मानसी से गुस्सा होकर उसे हमेशा-हमेशा की लिए मार डाला, जिसकी वजह से मैंने तुम्हें खो दिया। अब जो मानसी तुम्हारे सामने खड़ी हैं, उसे तुम अपना फिमेल वर्जन समझ सकते हो।"

            "ये सुनकर बहुत अच्छा लगा।

            "थैंक्स। अब जल्दी से मेरे इस कोश्चन का आन्सर दो कि क्या अब हम दोनों एक-दूसरे के बेस्ट फ्रेंड हैं ?"

           "हाँ, बट मैं तुम्हारी ओर फ्रेंडशीप के लिए हाथ बढ़ाने से पहले जो कंडीशन रखनेवाला हूँ, उसे सुनने के बाद हो सकता हैं कि तुम अपना हाथ वैसे ही छुपा लो, जिस तरह तुमने आज से करीब उन्नीस-बीस माह पहले छुपाया था।"

            "और तुम्हारी कंडीशन भी शायद वही होगी, जो उस समय तुमने मेरे सामने रखी थीं, 'दोस्ती को सिर्फ दोस्ती तक हीं सीमित रखना होगा ?"

              "हाँ।"

              "मैं इस बार तुम्हारी ये कंडीशन खुले दिल से एक्सेप्ट करती हूँ। बाइ द वे, तुम ये कंडीशन मेरे सामने नहीं भी रखते, तब भी मैं फ्रेंडशीप की लिमिटेशन क्राॅस नहीं करती। जानना चाहते हो क्यों ?"

             "क्यों ?"

             "मैं अब तुम्हारे साथ दुबारा पुराना रिश्ता जोड़कर किसी को वही दर्द नहीं देना चाहती हूँ जैसा उसने मुझे दिया था, क्योंकि मैं अच्छी तरह से जान गई हूँ कि हमसे हमारा प्यार कोई छीन ले तो कितनी तकलीफ होती हैं।"

            "मानसी, मुझे नहीं लगता हैं कि तुम मेरे साथ फ्रेंडशीप करने के लिए सीरियस हो, अदरवाइज तुम मेरी पहली कंडीशन को फ्रेंडशीप होने से पहले हीं ब्रीच नहीं करती।"

            "ओह नो यार, मैं तो भूल हीं गई थीं कि मुझे तुम्हारे और निक्की के रिलेशन के बारे में डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तुम्हारे साथ चर्चा नहीं करनी हैं। आई एम सो साॅरी फार इट।"

            "इट्स ओके।"

            "चलो, जनाब का मूड कुछ अच्छा हैं इसलिए जल्दी माफी मिल गई, अदरवाइज पता नहीं कितनी देर मनाना पड़ता ? चल मानसी, अब जल्दी से हाथ बढ़ाकर इससे फ्रेंडशीप डन कर ले, अदरवाइज पता नहीं ये कब; कौन-सी बात पर नाराज हो जाए और ये गोल्डन चांस हाथ से निकल जाए।"

           "यार, खुद के साथ हीं बात करनी हैं तो आराम से अपनी कार में बैठकर करों न, मेरे पास खड़ी होकर मेरा टाइम क्यों वेस्ट कर रहीं हो ?"

           "साॅरी बाॅस, दिस इज माइ लास्ट मिस्टेक फार टूडे। अब कम से कम आज दिनभर तो कोई मिस्टेक नहीं करूँगी।" मानसी ने अपने कान पकड़कर मासूम-सा चेहरा बनाकर कहा तो न चाहते हुए भी हर्षित के चेहरे पर मुस्कुराहट उभर आयी।

             "ओके बाॅस, अब मैं चलती हूँ। निक्की कार में मेरा वेट कर रही हैं। तुम हमारी कैम्पेनिंग टीम को आज से ज्वाइन कर रहे हो या ........?"

            "आज का मेरा पूरा दिन हमारे क्लब मेम्बर्स के लिए बुक हैं। मैं कल सुबह ........।"

            "ओके, थैंक्स।" कहकर मानसी अपनी कार की ओर बढ़ गई।
                           ...................

         "हर्षित, तुम्हारा चेहरा देखकर लगता हैं कि तुम्हें भी कोई पाॅजिटिव रिस्पांस नहीं मिला।" अपने ग्रुप के साथ काॅलेज के कैंटिन में बैठी मानसी ने हर्षित के दाखिल होते हीं उसके चेहरे को गौर से देखते हुए अपना अनुमान व्यक्त किया।

         "यू आर राइट मानसी, इस काॅलेज में हम लोगों के आपसी झगड़ों की वजह से हम लोगों की पैनल की इमेज इतनी खराब हो चुकी हैं कि इस बार हमारी पैनल को वोटिंग करने के लिए की जानेवाली मेरी अपील को कोई सीरियसली लेने के लिए तैयार नहीं हैं। ज्यादातर लोग मेरी अपील पर डायरेक्ट कोई रिस्पांस देने से बच रहे हैं, लेकिन यहाँ का माहौल बता रहा हैं कि हमारे फेवर में इस बार वैसी बम्पर वोटिंग होने की न के बराबर पाॅसिब्लिटी हैं, जैसी पिछले दो इलेक्शन में हुई थीं।" हर्षित ने मानसी की बात का हताश स्वर में जवाब दिया।

           "हर्षित, झूठ मत बोलो यार। इस काॅलेज में हमारी पूरी पैनल की इमेज खराब नहीं हुईं हैं, बल्कि सिर्फ मानसी की इमेज खराब हुईं हैं जिसके लिए रिस्पांसिबल भी यही हैं। ये इस कैंटिन वाले पर तुम्हें चाय-काॅफी पिलाने की वजह से झूठा एलीगेशन नहीं लगाती और तुम्हें पब्लिकली उल्टा-सीधा नहीं सुनाती तो हमारे इलेक्शन हारने की नौबत कभी नहीं आती, बट इसके लिए तुम भी काफी हद तक रिस्पांसिबल हो। तुम हमारी पैनल की प्रेसीडेंट की कैंडिडेटशीप एक्सेप्ट कर लेते तो भी ऐसी सिच्युएशन पैदा नहीं होती, लेकिन तुम फाॅर्म सबमिट करने की लास्ट डेट को अपनी बुआ की बीमारी का बहाना बताकर मैदान से भाग गए और ऊपर से इस पोस्ट के लिए मानसी को फाॅर्म सबमिट करने के लिए कहकर हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर दीं। एनी वे, तुम दोनों को जो करना था, तुम लोग कर चुके हो। अब हमें अपने एकार्डिंग चलने के लिए फ्री कर दो। हो सकता हैं कि हम लोग तुम दोनों से अलग होकर कैम्पेनिंग करेंगे तो कुछ मैजिक हो जाए और हम लोगों की इज्जत बच जाए।" मानसी के लेफ्ट साइड में बैठे चेतन की बात खत्म होते मानसी के चेहरे पर गहरी पीड़ा के उभर चुके थे।

           वह कुछ कहने के लिए मुँह खोलने हीं वाली थीं कि तभी उसके राइट साइड में बैठी निक्की ने उसे हाथ के इशारे से रोककर अपनी बात शुरू कर दीं- "चेतन, तुम्हें एक ऐसी लड़की को उल्टा-सीधा बोलते हुए जरा-सी भी शर्म नहीं आ रही हैं जो इमोशनली हर्ट होने के बावजूद अपना सारा दर्द भूलकर तुम लोगों के साथ सिर्फ इसलिए खड़ी हुई, क्योंकि उससे तुम लोगों के चेहरे पर छायी मायूसी देखी नहीं जा रही थी। और सुनो, तुमने ये तो बता दिया कि मानसी ने क्या-क्या गलतियाँ की, लेकिन तुमने ये नहीं बताया कि जब मानसी ने ये गलतियाँ की, तब तुमने इसके साथ होने के बावजूद इसे रोकने की कोशिश क्यूँ नहीं की ?"

          "निक्की, तुमने बिल्कुल सही पाईंट पकड़ा। इसने ये सब करने से मानसी को कभी रोकने की कोशिश नहीं की। उल्टा ये तो ये सब करने के लिए हमेशा मानसी को उकसाता रहा, क्योंकि ये हमेशा से चाहता था कि हर्षित हम लोगों के ग्रुप से निकल जाए, ताकि इसे हमारे ग्रुप की लीडरशीप करने का मौका मिल सके। इसने अपने इसी गोल को अचिव करने के लिए हम सबको इस बार हर्षित पर मानसी के साथ चीटिंग करने का एलीगेशन लगाकर हमारी पैनल की कैंडिडेटशीप न देने के लिए कन्वेंस किया और अब हर्षित के इलेक्शन में कैंडिडेट न होने की वजह से इसे हमारी पैनल के साथ अपनी हार नजर आ रही हैं तो इसने गिरगिट की तरह रंग बदलकर इसके लिए मानसी और हर्षित को रिस्पांसिबल ठहरा दिया। साॅरी चेतन, मुझे तुम्हें गिरगिट के साथ कम्पेयर नहीं करना चाहिए था क्योंकि रंग बदलने में तुम गिरगिट से भी ज्यादा माहिर हो।" निधि के व्यंग्य बुझे तीर के सटीक प्रहार से चेतन का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। वह बिना कुछ कहे अपनी जगह से उठा और कैंटिन से बाहर निकल गया।

          "जहाज डूबता हैं तो सबसे पहले चूहे कूद कर भागते हैं।" चेतन जब बाहर निकल रहा था, तब भी निधि उसे घृणित नजरों से देखते हुए एक व्यंग से बुझा तीर उसकी ओर छोड़ा, लेकिन उसका भी चेतन ने कोई जवाब दिया।

           "यू आर राइट निधि, ये कहावत इस जैसे लोगों के लिए ही बनी हैं, पर मैं तुम लोगों की जानकारी के लिए बता दूँ कि हम लोगों की स्थिति इतनी भी खराब नहीं हैं, जितनी मैंने इस कैंटिन में आते हीं बताई थीं। वो तो मैंने ये देखने के लिए हमारी पोजीशन जान-बूझकर कुछ ज्यादा ही खराब बता दी थीं कि कौन-कौन लोग दिल से हमारी पैनल के साथ हैं और कौन-कौन लोग सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए साथ हैं। जो दिल से साथ थे, वे लोग रूके हुए हैं और जो सिर्फ अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए हम लोगों के साथ था, वो हमारे बीच से जा चुका हैं इसलिए मैं अब तुम लोगों को रियल पोजीशन बता देता हूँ।

             एक्चुअल पोजीशन ये हैं कि फिलहाल हमारी पैनल और बबलू एंड कम्पनी की पैनल को लगभग बराबर सपोर्ट मिल रहीं हैं, लेकिन यदि हम इस इलेक्शन का बायकाट करने वाले लोगों को वोटिंग करने के लिए कन्वेंस कर लेते हैं तो हमारी पैनल को क्लियरली लीड मिल जाएगी, क्योंकि जो ढहाई-तीन सौ लोग हमारी पैनल की आपसी खीचतान की वजह से हमसे निराश होकर इस इलेक्शन का बायकाट करने का डिसिजन ले चुके हैं, वे हम लोगों के फेवर के लोग हैं। हमें एक-एक करके उन सभी से पर्सनली मिलकर इस बात का यकीन दिलाना होगा कि हम लोग बबलू एंड कम्पनी से काफी अलग हैं और उनके हमें भी बबलू एंड कम्पनी की तरह समझकर इलेक्शन का बायकाट करने से बबलू एंड कम्पनी जीतकर काॅलेज का माहौल खराब कर सकती हैं। आई होप कि काॅलेज का माहौल खराब होने से बचाने के लिए हमसे डिस्पाईन्टेड हुए लोग भी हमारे फेवर में वोटिंग करने के लिए तैयार हो जाएँगे।" हर्षित की बात सुनकर उसके आसपास बैठे सभी लोगों के चेहरों पर कुछ इस तरह के राहत के भाव उभर आए, जैसे मरूस्थल में भटक-भटककर प्यास से बेहाल हो चुके मुसाफिरों को आसपास कहीं से पर्याप्त पानी होने की सूचना मिलने पर उनके चेहरों पर राहत के उभर आते हैं।

           "मेरे पास भी एक बेहतरीन आइडिया हैं।" हर्षित की बात खत्म होते हीं निक्की ने उसकी तरफ देखकर कहा।

           "मानसी, मैं शर्मा सर का पीरियड अटैंड करने जा रहा हूँ। मैंने लगातार चार दिनों तक कोई भी पीरियड अटैंड नहीं किया, इस वजह से मेरे लिए आज कोई न कोई पीरियड अटैंड करना जरूरी हैं। मैं अब से ठीक पैतालीस मिनट बाद लंच टाइम में तुमसे मिलूँगा, तब तक तुम बाकी लोगों के फार्मुले सुन लो और इनमें से कोई काम का लगे तो मुझे बता देना।" निक्की की बात को अनसुना करके हर्षित ने अपनी बात कही और कैंटिन से बाहर निकल गया।

           "डोंट वरी निक्की, थोड़े दिनों में सब ठीक हो जाएगा।" हर्षित के बाहर निकलते हीं मानसी ने निक्की का हाथ पकड़कर उसे सांत्वना दी।

           "मुझे तसल्ली देने के लिए थैंक्स, बट मुझे नहीं लगता हैं कि कभी कुछ ठीक होगा।" निक्की ने जवाब में कहा।

          "अरे, थोड़ा पेशंस रखो यार, सब ठीक हो जाएगा।"

           "यार मानसी, इतने शार्ट पीरियड में तुम्हारे, निक्की और हर्षित के बीच इतनी जल्दी-जल्दी रिलेशन चेंज हुए हैं कि इनके बारे में जानकर इंग्लैंड का मौसम भी शर्मिन्दा हो जाएगा। पहले हर्षित का तुम्हारे साथ अफेयर था और निक्की के साथ फ्रेंडशीप थी, फिर तुम्हारा हर्षित के साथ ब्रेक-अप हुआ और हर्षित का निक्की के साथ अफेयर शुरू हुआ, इसके बाद हर्षित और निक्की के बीच डिस्टेंस पैदा हो गया और तुम्हारी निक्की के साथ फ्रेंडशीप हो गई और फिर आज तुम्हारी भी हर्षित के साथ फ्रेंडशीप हो गई, पर इन सबसे इन्ट्रेस्टिंग ये लग रहा हैं कि तुम अपने एक्स और उसकी प्रजेंट लवर के बीच के पैदा हुए डिस्पुट्स दूर करने की पूरी ताकत से कोशिश कर रही हो। कसम से मैं तो कभी सोच भी नहीं सकती थीं कि एक लड़के और दो लड़कियों के बीच इतने स्ट्रेंज रिलेशन हो सकते हैं।"

            "निधि, तुम हम तीनों के बीच बार-बार बदल रही कैमेस्ट्री को लेकर हम तीनों का मजाक उड़ा रही हो ?"

             "अरे नहीं यार, मैं तो तुम्हारे इतनी जल्दी निक्की के प्रति अपनी नाराजगी भूलाकर उसकी क्लोज फ्रेंड और हमदर्द बनने और निक्की के मन में तुम्हारे लिए पैदा हुई ब्लाइंड फैथ पर हैरानी जता रही हूँ।"

            "बट मुझे इसमें हैरानी जैसी कोई बात नजर नहीं आ रही हैं, क्योंकि हम तीनों के बीच बनी कैमेस्ट्री की वजह बेहद सिम्पल और नार्मल हैं। मैंने रियलाइज कर लिया कि मैं हर्षित को एज द लवर हमेशा के लिए खो चुकी हूँ इसलिए उसके और उसकी प्रजेंट लवर के बीच पैदा हुए डिस्टेंस को दूर करने की कोशिश कर रही हूँ और निक्की को मुझ पर हद से ज्यादा ट्रस्ट इसलिए हो गया क्योंकि वो जानती हैं कि मैं उसके साथ अपने सारे डिस्पुट्स भूलकर उसके और हर्षित के बीच पैदा हुए डिस्टेंस को दूर करने के लिए ऑनेस्टली ट्राई कर रही हूँ।"

          "ठीक हैं, बट तुम्हारे अंदर इतना चेंज आने की वजह क्या हैं ? मैंने पहले तो कभी तुम्हें इस टाइप की सोशल एक्टीविटिज में इस तरह इमोशनली अटैच होते हुए नहीं देखा। अचानक ऐसा क्या हो गया कि तुम विकास का फिमेल वर्जन बन गईं ?"

            "मैंने कल रात .......।"

            "मानसी, प्लीज कल ......।"

            "डोंट वरी निक्की, मैं वो राज डिस्क्लोज नहीं कर रही हूँ जिसे तुम सीक्रेट रखना चाहती हो। मैं तो इसे सिर्फ ये बता रही हूँ कि कल रात मुझे एक लड़के और उसकी दिल के रिश्ते की बुआ के बीच के होली लव के बारे में पता चला तो मुझे लगा कि रिश्तों के मामलों में मैं बहुत गरीब हूँ और तभी मैंने फैसला किया कि अब मैं सिर्फ प्यार बाँटती रहूँगी, ताकि मुझे भी कोई इतनी शिद्दत से प्यार करने लग जाए, जैसा उस लड़के से उसकी दिल के रिश्ते की बुआ करती हैं और मैंने निक्की को अपनी सगी बहन की तरह प्यार करना शुरू करके अपने इस फैसले का इम्प्लिमेंटेशन भी स्टार्ट कर दिया। अब इन बातों को छोड़ो और इलेक्शन कैम्पेनिंग में तेजी लाने के लिए किसी के पास कोई आइडिया हो तो बताओ। निक्की, तुम थोड़ी देर पहले कुछ कह रही थीं, तुम हीं पहले अपना आइडिया हमारे सामने रख दो।"

           मानसी की बात खत्म होने के बाद निक्की अपनी बात उसे समझाने लगी।
                            ..................

            "भइया, दीदी कह रही थीं कि वे नीचे आने की कंडीशन में नहीं हैं, इसलिए आप उनसे मिलने ऊपर उनके कमरे में चलें जाइए।" एक सावली-सी नवयुवती ने घर के हाल में खड़े हर्षित के पास आकर बताया तो उसके चेहरे पर हल्का-सा तनाव उभर आया।

          "चलो, मुझे उनका कमरा दिखा दो।" कुछ पलों तक सोच-विचार करने के बाद हर्षित ने कहा।

         "आइए ।" कहकर वह नवयुवती उसी जीने की ओर बढ़ गई, जिससे उतरकर हाल में आयी थीं। हर्षित भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ा।

         "यही हैं दीदी का रूम।" फर्स्ट फ्लोर पर पहुँचने के बाद एक कमरे की ओर इशारा करके बताया और वह नवयुवती वापस लौट गई।

           हर्षित ने उस कमरे के सामने पहुँचकर उसके गेट पर हल्की-सी दस्तक दी, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो कुछ झिझक के साथ हर्षित ने गेट पुश किया और अंदर दाखिल हो गया। 

         "निधि, ये क्या बचपना हैं यार ?" अंदर पलंग पर तकिए में मुँह छिपाकर लेटी लड़की पर नजर पड़ते ही हर्षित ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, लेकिन उस लड़की से उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

         "निधि, आर यू ओके ?" कुछ पलों की खामोशी के बाद हर्षित ने कुछ चिंतित स्वर में पूछा।

          "मैं बिल्कुल भी ओके नहीं हूँ हर्षित। प्लीज हेल्प मी।"  लड़की ने पलटकर हर्षित की ओर देखते हुए जवाब दिया जो हर्षित के ग्रुप की लड़की निधि थीं।

          "निधि, तुम बेझिझक अपनी वो प्राॅब्लम मेरे साथ शेयर कर सकती हो, जिसे शेयर करने के लिए तुमने मुझे यहाँ बुलाया।"

            "हर्षित, मेरी समझ में नहीं आ रहा हैं कि मैं अपनी प्राॅब्लम तुम्हारे साथ शेयर कैसे करूँ ? पता नहीं मेरी प्राॅब्लम सुनकर तुम मेरे बारे में क्या सोचोगे, बट इसे किसी राइट पर्सन के साथ शेयर नहीं करूँगी तो साॅल्व भी नहीं होगी, इसलिए तुम्हें बता हीं देती हूँ।

           एक्चुअली बात ये हैं कि हमारे ग्रुप के चेतन के साथ मेरा पिछले आठ-नौ माह से अफेयर चल रहा हैं और इस दौरान हम दोनों के बीच लगभग हर दिन फिजिकल रिलेशन भी बनते रहें, लेकिन कल उसके ग्रुप छोड़ देने पर मैंने उसे उल्टा-सीधा बोल दिया तो उसने इतनी-सी बात के लिए मुझसे रिश्ता तोड़ दिया और मैंने कल शाम को फोन करके डेली की तरह मेरे घर आकर मेरे साथ फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए कहा तो उसने साफ मना कर दिया जिसके बाद रातभर में मुझे अहसास हो गया कि मैं सेक्स एडिक्ट हो गई हूँ और हर चौबीस घंटे में एक बार किसी के साथ फिजिकल रिलेशन बनाए बिना नहीं रह सकती हूँ। मैं अपनी इस प्राॅब्लम से निजात पाने के लिए आज एक साइकेट्रिस्ट के पास गई थीं तो उसने मेरा ट्रीटमेंट तो स्टार्ट कर दिया, लेकिन साथ हीं एक ये बात कहकर मेरी प्राॅब्लम बढ़ा दी कि उसके ट्रीटमेंट का नतीजा लगभग वन मंथ के बाद नजर आएगा और तब तक मुझे किसी न किसी जरूरत के अनुसार मुझे किसी न किसी के साथ फिजिकल रिलेशन बनाते रहना होगा। मैंने अपने एक अच्छे और भरोसेमंद दोस्त अपनी ये प्राॅब्लम को बताई और वन मंथ तक जरूरत के अनुसार मेरे साथ फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए तैयार कर लिया, लेकिन वो फिलहाल कल तक के लिए बाहर हैं, इसलिए तुम सिर्फ आज एक बार मेरी ये नीड पूरी कर दो। मैं पिछले चौबीस घंटे से पानी से बाहर निकाली हुई मछली की तरह छटपटा रही हूँ। प्लीज हेल्प मी।"

        "ओके, मैं तुम्हारी हेल्प करने के लिए तैयार नहीं हूँ बट उस वे में नहीं, जिस वे में तुम चाह रही हो। तुम कल काॅलेज आकर स्टूडेंट्स को जमा करके मुझ पर ये एलीगेशन लगा देना कि मैंने चेतन को मानसी से अपनी पेनल का सेकेट्री का कैंडिडेट डिक्लियर कराने की एवज में तुमसे कई बार फिजिकल रिलेशन बनाए और अब मैं चेतन के लिए कैम्पेनिंग करने के बदले भी तुमसे यही सर्विस चाह रहा हूँ, इससे तुम्हारा और चेतन का मेरी इमेज खराब करके बबलू एंड कम्पनी को इलेक्शन जीतने में हेल्प करने और बदले में उनके सपोर्टर्स के वोट लेकर चेतन को इलेक्शन जिताने का मिशन पूरा हो जाएगा, क्योंकि मैं ये एलिगेशन पर कोई सफाई देने की जगह इसे बिना ना-नुकुर किए एडमिट कर लूँगा और इस एलिगेशन की विश्वसनीयता पर कोई कोश्चन मार्क लगने के चांसेज हीं खत्म हो जाएँगे, बट प्लीज तुम ये मनगढँत स्टोरी सुनाकर अपनी हेल्प के नाम पर मेरे और अपने कैरेक्टर पर बदनुमा दाग मत लगाओ। आई एम गोईंग नाऊ।"

         "हर्षित, प्लीज एक मिनट रूको।"

          "बोलो ...।"
  
          "हर्षित, ये सच हैं कि मैं सेक्स एडिक्ट नहीं हूँ और मैं अपने इस इस टाइप के एडिक्शन से परेशान होकर नहीं बल्कि वीडियो रिकार्डिंग करने के लिए तुम्हारे साथ फिजिकल रिलेशन बनाना चाहती थीं, बट ये मैं अपनी मर्जी से नहीं करना चाह रहीं थीं, बल्कि चेतन के पास मेरी एक कमजोर नस दबी होने की वजह से उसके कहने पर मजबूरी में कर रही थीं। एक्चुअली, मैंने उसके साथ ये सोचकर चार-पाँच बार फिजिकल रिलेशन बना लिए थे कि वो एक अच्छा लड़का हैं, इसलिए मेरे साथ कभी चीटिंग नहीं करेगा। उसने मुझसे प्राॅमिश भी किया था कि वो अपना करियर बनाने के बाद मुझसे हीं शादी करेगा, लेकिन .....।"

           "वो अपने प्राॅमिश से मुकर गया, यही न ?"

           "मुझे पता नहीं हैं कि वो अपने प्राॅमिश से मुकर गया हैं या नहीं और मुझे ये जानने में कोई इन्ट्रेस्ट भी नहीं हैं क्योंकि अब मैं खुद उससे न तो शादी करना चाहती हूँ और न इन फ्यूचर उसके साथ कोई रिलेशन रखना चाहती हूँ लेकिन चेतन ने हिडन कैमरे हम दोनों के अंतरंग पलों की वीडियो क्लिप्स बना लीं हैं और मुझे उसने उसे इंटरनेट पर अपलोड करने की कल शाम को धमकी देकर तुम्हारे साथ फिजिकल रिलेशन बनाने और उसकी रिकार्डिंग करने के तैयार किया, ताकि इस रिकार्डिंग के दम पर तुम्हें अपनी पेनल के पीछे से अपना हाथ खींचने के लिए मजबूर कर सके और बबलू एंड कम्पनी के साथ क्राॅस काम्बिनेशन करके इलेक्शन जीत सके। तुम्हारे बाद उसने मुझे यही काम बबलू के साथ भी करने के लिए कहा हैं, बट बबलू को मुझे कोई कहानी नहीं सुनाकर मेरे साथ फिजिकल रिलेशन बनाने के एग्री नहीं करना हैं, क्योंकि बबलू तो ऐसा ऑफर खुद हीं ढूँढता हैं।"

           "यार, मैं तो इस बात की इमेजिन भी नहीं कर सकता था कि हमारे काॅलेज के स्टूडेंट्स इस मामूली से इलेक्शन के विनर बनने के लिए इस टाइप के घिनौने हथकंडे भी यूज करने की कोशिश कर सकते हैं। ये सुनकर मैं तो एकदम शाॅक्ड हो गया।"

            "मुझे भी कल शाम जब चेतन ये बातें कही तो मैं भी इसी तरह से शाॅक्ड हुई थीं। मुझे तो चेतन की बात सुनने के बाद यकीन हीं नहीं हुआ कि उसने ये बात मुझसे सीरियसली कही हैं। मैं पागलों की तरह बार-बार उससे कहती रही कि वो मुझे सताने के लिए मेरे साथ मजाक कर रहा हैं, लेकिन जब उसने मुझे अपने मोबाइल में हम लोगों के प्राइवेट मोमेंट्स की वीडियो क्लिप्स दिखाकर अपनी बात रिपीट की तो मेरे पैरों के नीचे की जमीन हीं खिसक गईं, क्योंकि मैं कभी ख्वाब में नहीं सोच सकती थीं कि जिस पर ट्रस्ट करके मैंने अपने पैरेंट्स तक के विश्वास को तोड़ दिया और मेरे सबसे ज्यादा कीमती अपनी अस्मिता तक को दाॅव पर लगा दिया, वो हम दोनों के प्राइवेट मोमेंट्स की रिकार्डिंग कर सकता हैं और उस क्लिप के सहारे अपनी किसी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए मुझे ब्लैकमेल करके किसी दूसरे के साथ फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए मजबूर कर सकता हैं।"

           "निधि, चेतन ने तुम्हारे साथ वाकई बहुत गलत किया, लेकिन इसके लिए अफसोस जाहिर करने से कोई बेनीफिट नहीं होनेवाला हैं, इसलिए हमें इस बात पर अफसोस करने की जगह ये सोचना चाहिए कि चेतन से वो वीडियो क्लिप्स कैसे हासिल की जाए।"

            "यू आर राइट हर्षित, बट मैंने पहले आपको अपनी प्राॅब्लम इसलिए नहीं बताई, क्योंकि चेतन के मेरे साथ विश्वासघात करने के बाद मेरे लिए किसी पर भी विश्वास कर पाना बेहद मुश्किल काम था, पर पता नहीं क्यों मुझे बाद में ऐसा लगा कि तुम पर विश्वास करके तुम्हें अपनी प्राॅब्लम बता देनी चाहिए, इसलिए मैंने तुम्हें अपनी प्राॅब्लम बता दीं। अब ये  तुम्हारे ऊपर डिपेंड करता हैं कि तुम मुझे इस प्राॅब्लम से बाहर निकलने में मेरी हेल्प करते हो या नहीं। मैं तुम्हें मेरी हेल्प करने के लिए मजबूर नहीं करूँगी, बट इतना जान लो कि तुमने मेरी हेल्प नहीं की तो मेरे पास सुसाइड करने के अलावा कोई आॅप्सन नहीं रह जाएगा।"

           "डोंट वरी, मैं ऐसी सिच्युएशन नहीं बनने दूँगा कि तुम्हारे पास सुसाइड करने के अलावा कोई ऑप्शन न बचें। हम लोग आज हीं पुलिस के .......।"

            "यार, हम लोग पुलिस के पास नहीं जाएँगे क्योंकि पुलिस के पास गए तो चेतन वो वीडियो क्लिप्स इन्टरनेट पर अपलोड कर देगा और मैं और मेरी फेमिली किसी को मुँह दिखाने के काबिल नहीं रहेगी। बाइ चांस पुलिस क्विक एक्शन लेकर उसे वीडियो क्लिप्स इन्टरनेट पर अपलोड करने से रोक लेगी और उससे उन वीडियो क्लिप्स की क्लिप्स की सारी काॅपिज हासिल करने में कामयाब भी हो जाएगी तो भी मेरी फेमिली और बाकी परिचित लोग तो ये जान ही जाएँगे कि मैं वो सारी हदे पार कर चुकी हूँ जो मुझे नहीं करनी चाहिए थी, इसलिए कोई ऐसा प्लान बताओ भाई, जिससे हम चेतन को हम उन वीडियो क्लिप्स की सारी काॅपिज डिलीट करने पर मजबूर कर दे और मेरी लाइफ के इस ब्लैक यूनिट के बारे में किसी को पता भी न चले।"

            "ऐसा तो एक हीं कंडीशन में पाॅसिबल हो सकता हैं।"

            "तो मुझे वो कंडीशन बताओ न यार, प्लीज।"

            "फिलहाल तुम चेतन की बात मान लो और वो जैसा कह रहा हैं, वैसा ....।"

             "वही तो कर रही थीं बट शायद तुमने इस फ्लावर पोट में छुपा वीडियो रिकार्डर देख लिया, इसलिए अब मैं आधा काम तो वैसे भी नहीं कर पाऊँगी।"

           "मैं ये हिडन वीडियो रिकार्डर नहीं भी देख पाता तो भी तुम्हारी इस नाॅनसेंस स्टोरी पर यकीन करके ऐसा कुछ नहीं करता जो तुम चेतन के कहने से मुझसे करवाना चाह रहीं थीं और न तुम मुझसे ऐसा कुछ करवाने की कोशिश करोगी। तुम्हें चेतन को ये बताना हैं कि मैंने तुम्हारा हिडन कैमरा देख लिया था, इसलिए मैं तुम्हारे जाल में नहीं फँसा। मुझे यकीन हैं कि वो सुनने के बाद तुम्हें कुछ न कहकर बाकी का आधा काम करने के लिए कहेगा और हमारे जाल फँस जाएगा। अब मैं तुम्हें समझाता हूँ कि इससे आगे क्या करना हैं।"

            "ओके, बोलो..।" हर्षित  का जवाब सुनने के बाद हर्षित उसे अपना प्लान समझाने लगा।

            (Rest story read in next part which is coming soon)

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