।।प्यार तो है ना।।

" कान तो दिबारों के भी होते हैं।तू तो फिर भी उन कमीनों  के बीच अपने राज खोल कर आया है,जो पीठ पीछे न जाने क्या क्या कहते रहते हैं।

महेश ने अपने मित्र विनीत से कॉलेज की सीढ़िया चढ़ते हुए कहा।

"तू भी न बहोत शकी टाइप का है।वो लोग ऐसे नही है।
विनीत ने अपने मोटे चश्मे को ठीक करते हुए सफाई दिया।

"भई मेरा काम था तुझे शतर्क करना ,आंगे तेरी अपनी मर्जी।

महेश भुनकते हुए तुरंत बोल पड़ा और क्लास रूम में चला गया।पीछे पीछे विनीत भी गया।

"लेकिन वो सब तो मेरे बचपन के दोस्त हैं।वो भला मेरे साथ धोखा क्यूँ करेंगे?

विनीत ने बेंच पे बैठते हुए पूँछा।

"तो क्या तू अपनी मंगेतर की डेट भी साझा करेगा की तू उससे मिला था,उसके साथ सिनेमा हॉल गया था।

महेश ने चिड़ चिड़ाते हुए कहा,तो विनीत चुप सा हो गया।और महेश का मुँह ताकने लगा।

"सुन अगर रानू को पता चल गया की तू उसके बारे में अपने दोस्तों से बाते करता है।तो उसे कैसा लगेगा?

महेश बैग से किताब निकालते हुए कहा।

"ये बात तो है,"

विनीत सोचते हुए बोल पड़ा

"देख बहोत मुश्किल से तुझे एक गर्लफ्रैंड मिली है,कम से कम ,उसकी बदलामी तो मत कर।

महेश ने आंगे समझाते हुए कहा।तभी टीचर क्लास में आ जाते हैं।

"धत्त तेरी की मुझसे कितनी बड़ी गलती हो गई।मैंने तो अपनी और रानू के बीच की सारी बातें बता दी हैं।

विनीत ने परेशान होते धीरे से महेश को बताया,तो महेश उसे चुप रहने को इसारे देता है।सामने टीचर बैठे हैं।विनीत को चिंता सी होने लगी।और वह मन ही मन सोचने लगा।अगर वो कमीने दोस्त कहीं रानू की बदलामी न कर दें।उसका मजाक न उड़ायें।
रानू तो हाँथ से गई।कितनी मुश्किल से वह मिली थी।और कितना प्यार करती है उसे।और उसने क्या किया?दोस्तो के सामने डींगें मारने के चक्कर मे अपने ही पैर पे कुलाढी मार बैठा।उसके और अपने रिश्ते की बात सारे आम बोल दिया।
ये मुझसे क्या हो गया?उन गबार दोस्तों का कोई भरोसा नही है।कोई काम भी तो नही है उनके पास।पढ़ाई लिखाई तो कब से छोड़ छाड़ के बैठे हैं।मटरगस्ती करते फिरते हैं।

कॉलेज का सारा दिन विनीत चिंता फिकर करते ही सोचता रहा।जबकि अगले महीने से उसके पेपर भी होने वाले हैं।जहां महेश पढ़ाई में डूबा हुआ है, वही विनीत अपने लगे हुये ग्रहण के बारे में सोच रहा है।
रानू उसके ही गांव की लड़की है।दूर कहीं की होती तो भी एक बार चल जाता।लेकिन उसी गांव की होने की वजय से चिंता होना भी जरूरी है।जब बाते होंगी तो नाम दोनो का उछाला जायेगा।
जहां उसके परिवार और रानू के परिवार के सम्बंध ठीक ठाक है।वही उसके और रानू के इश्क मोहब्बत की खबरे दोनो परिवार के रिस्ते भी बिगाड़ देगा।

शाम हो चली थी।महेश ने समझाया बुझाया था कि एक बार रानू से बात करके उसे पूरी सच्चाई बता दे।ताकि उसे फिर बुरा न लगे।और समझ सके।पर विनीत किस मुँह से रानू से बात करे।उसे तो अपने आप पे गुस्सा आ रहा है।
वह अकेला ही घर जा रहा है।उसके दिमाक में अभी भी बदलामी का डर बैठा हुआ है।उन दोस्तो से बात करने का भी कोई फायदा नही है।अब तक तो पूरे गांव में ब्रेकिंग न्यूज़ बन गया होगा।उसका और फले घर की लड़की का चक्कर चल रहा है।
बेचारा उदास,थका मारा घर तो जा रहा है।लेकिन उसका घर पे कैसा स्वागत होने वाला है जिससे वह अनजान हैं।

हमारे समाज मे प्यार करना भी कितना गलत माना जाता है न।जैसे कोई अपराध हो।कोई गुनाह हो।जबकि प्यार तो एक खूबसूरत अहसास है।जो इंसान के जीवन को खुशियों से भर देता है।किसी का साथ हो तो जीवन की सारी दिक्कते आसानी से कट जाती हैं।

विनीत का प्यार भी तो ऐसा ही है।रानू को जब भी अपने पास पाता है तो वह एक अलग ही जहान में होता है।उसे देखना,उसे ताकना,उसकी बातें सुनना और उसकी हर ख्वाहिश को पूरा करना।कितना अच्छा लगता होगा न।प्यार ऐसा ही होता है।जिसे हम अपने ही अंग का हिस्सा मानते हैं।
विनीत का प्यार भी,एक या दो दिन का नही है।बल्कि उसने तो अपनी सारी जिंदगी रानू के साथ जीने का फैसला किया है।उससे शादी करके,उसे अपना बना कर।लेकिन उसका सपना तभी पूरा होगा जब वह किसी लायक बन जायेगा।फिर वह हक से रानू का हाँथ ता उम्र के लिए मांग सकता है।फिर उसे छुप छुप के मिलना नही पड़ेगा।

लेकिन अब शायद ही उसका सपना पूरा हो पायेगा।उसकी एक गलती ने उसके पूरी योजना पे पानी फेर दिया।उसके प्यार को किसी और नाम का ही दर्जा दिया जा रहा होगा।लोग कैसी-कैसी बाते करते होंगे?
उसे इस बात का डर नही है कि लोग उसे क्या कहेंगे?  दुःख तो इस बात का है जिसे वह दिलों जान से ज्यादा चाहता है, अब उसे लोगो के ताने और बातों के प्रहार से गुजरना पड़ेगा।उसके आंख में आंशू होंगे।

घर पहुंचा ,तो किसी का उसपे कोई ख्वास ध्यान नही गया।घर का माहौल भी ठीक ही था।वह चुप चाप अपने कमरे में चला गया और जाते ही बेढाल सा बिस्तर पर लेट गया।मोबाइल पे नजर घुमाया तो रानू के 6-7 किस्ड कॉल थे।उसकी धड़कन और बढ़ गई।इतने सारे मिस्ड कॉल।इससे पहले तो रानू ने इतने कॉल कभी नही किये थे,और वो भी एक समय पे।
विनीत को पूरा यकीन हो चला था कि रानू को भनक हो गई होगी।और वह बहुत गुस्से में भी होगी।उससे बात करे या नही।माफी मांगे भी तो कैसे?क्या रानू उसे माफ करेगी या उससे रिस्ता तोड़ लेगी।
विनीत अपने आप मे सोचे जा रहा है।तभी फिर रानू का कॉल आया।विनीत कंपकपाते हुए हेलो बोला।

"कहाँ हो,फोन क्यूँ नही उठा रहे थे।

फ़ोन के दूसरे तरफ से रानू ने पूँछा।उसकी साधारण आबाज का अंदाजा लगा कर, विनीत समझ गया कि रानू गुस्से में नही है।

"कुछ काम था।

विनीत ने दुःखी मन से पूँछा।

"जब काम हो तभी फोन किया जाना चाहिए।

रानू ने शरारती मिजाज से जबाब दिया।तो विनीत के चहरे पे हल्की मुश्कान सी छा गई।

"इतने सारे मिस्ड कॉल थे।कोई जरूरी काम था।

विनीत ने रानू से फिर पूँछा।

"वो आज रात को हम सब बुआ के घर जाने बाले हैं।हप्ते भर तुमसे नही मिलूंगी।सोचा कि जाने से पहले मिल लेते।पर फ़ोन उठाना तो दूर ,तुमने व्यापस लगाया तक नही।

रानू ने आंगे बताया,तो विनीत को अपने आप से शर्म आने लगी।वह अपनी गलती पे शर्मिंदा हो रहा था।

"तुम कुछ बोल क्यूँ नही रहो,?इतने चुप से क्यूँ हो?

रानू ने बचतानी मिजाज से पूँछा।

"रानू एक बात है"

विनीत दुःखी मन से कहा।

"क्या बात है विनीत, तबियत तो ठीक है न"

रानू ने तुरंत परेशान होते हुए पूँछा, तो फिर विनीत ने सारी बात रानू को बता दी।वह अपने गलती की माफी भी मांगा।रानू चुप चाप सुन रही थी।उसकी आंखें भर आईं।

"रानू मैं तुमसे बहोत प्यार करता हूँ।मैं तुम्हे खोना नही चाहता।

विनीत ने भावुक होते हुए आंगे कहा।रानू ने फिर भी कुछ नही कहा।वह चुप सी रही।

"रानू प्लीज् मुझे माफ़ कर दो।आंगे से कोई गलती नही करूँगा।तुम्हारे बारे में किसी से भी कोई बात नही करूँगा।

विनीत ने रानू से निवेदन करते हुए माफी माँगा।तो रानू को हंसी आ गई।

"तो तुम अपनी मम्मी पापा से भी मेरे बारे में बात नही करोगे"

रानू ने चहकते हुए मजाक में पूँछा।

"नही,वो मतलब नही था।

विनीत हड़बड़ाते हुए बोल पड़ा।

"विनीत ये जरूरी नही की कौन हमारे बारे में क्या बात करता है।इज्जत तो हमारे बीच होनी चाहिए।तुम मुझे पसंद करते हो और मैं तुम्हे।मेरे लिए तो इतना ही काफी है।
रानू ने अपनी बात रखी,तो विनीत दंग सा रह गया।जिस लड़की को खोने बस से ,वह कब से उदास था,डर रहा था।हकीकत में वह कितनी समझदार है।और कितना सम्मान करती है।विनीत को रोना सा आने लगा।

"हमारे बीच प्यार तो है ना।

रानू ने आंगे विनीत से पूँछा।

"हमेसा रहेगा,रानू।मैं तुम्हे कभी नही फूल सकता।

विनीत ने भावुक होते हुए जबाब दिया।

"तो फिर जल्दी से बारात लेकर आ जायो।कहीं मैं ना भूल जायूँ।

रानू ने मजाक करते हुए कहा और फिर ठहाके मारते हुये हँस पड़ी,तो विनीत भी हंसते हुए बोल पड़ा।

"तुम्हे भूलने ही नही दूंगा,, मैं....


पंकज चतुर्वेदी
03/01/2019

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